धन्नासेठों की नई मंडी पर नहीं है तीसरी आंख का पहरा
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अपराध के लिहाज से संवेदनशील नई मंडी के चौराहों पर नहीं कोई सरकारी सीसीटीवी कैमरा
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पटेलनगर में डकैती और चंडीगढ़ परिवार से हुई लूट के मामले में सीसीटीवी कैमरे की खली कमी
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व्यापारिक संगठनों के आश्वासन के बाद परवान नहीं चढ़ सकी कैमरे लगाने की योजना
मुजफ्फरनगर, 13 जनवरी (बु.)। आर्थिक रूप से संपन्न माने जाने वाली नई मंडी क्षेत्र में सुरक्षा इंतजाम रामभरोसे है। चौंकाने वाली बात यह है कि इलाके में एक भी चौराहे पर सरकारी कैमरा नहीं है, जो अपराधियों की गतिविधियों को कैद कर सके। पटेलनगर में सेवानिवृत्त एसडीओ के आवास पर हुई डकैती और चंडीगढ़ परिवार से हुई लूट में सीसीटीवी कैमरों की कमी जरूर खली। यह स्थिति तब है, जब बरसों से नई मंडी का इलाका बदमाशों के निशाने पर है। हर बड़ी घटना के बाद पुलिस ने व्यापारियों को प्रेरित किया, लेकिन सीसीटीवी कैमरे नहीं लग पाए। डकैती की घटना के बाद यह आवाज फिर से उठने लगी है।
शहर के लिहाज से नई मंडी का इलाका अपराध की लिहाज से सबसे संवेदनशील माना जाता है। एक तो ऐशिया प्रसिद्ध गुड़ मंडी और दूसरा यह इलाका आर्थिक रूप से संपन्न माना जाता हंै। बदमाश बरसों से यहां घटनाएं कर कानून को चुनौती देते आ रहे है। इसी इलाके में प्रदेश सरकार में मंत्री कपिल देव अग्रवाल का आशियाना है। बावजूद इसके नई मंडी क्षेत्र में सुरक्षा के हाइटेक इंतजाम नहीं किए गए है, जबकि शहर के प्रमुख चौराहों पर पुलिस के अलावा एमडीए और नगर पालिका के सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन नई मंडी के किसी चौराहें पर सरकारी कैमरा नहीं लगा है, जो अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रख सके। वैसे नई मंडी क्षेत्र में आवास और प्राइवेट संस्थानों पर कै मरों की कमी नहीं है, लेकिन उनका दायरा घर के गेट और दूसरे परिसर से बाहर नहीं है। कुछ ही ऐसे कैमरे है, जिनका फोकस सडक़ पर है, लेकिन वो कै मरे इतनी हाई क्वालिटी के नहीं है, जिनसे किसी भी आपराधिक घटना में मदद मिल सके। नई मंडी के पटेलनगर में सेवानिवृत्त एसडीओ वीके अग्रवाल के आवास पर हुई डकैती के मामले में सीसीटीवी कैमरों की कमी खलती रही। एक-दो कैमरों से जरूर पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण इनपुट मिले, लेकिन अधिकांश से निराशा ही हुई। ऐसे में यदि चौराहों पर हाई क्वालिटी के कैमरे होते तो बदमाशों को पकडऩे में इतनी देर नहीं होती। बताया गया है कि एमडीए ने काफी पहले एक सीसीटीवी कैमरा नई मंडी में लगाया था, जो काफी दिन से खराब पड़ा है। नई मंडी में हर घटना के बाद सीसीटीवी कैमरे लगाने की बात जोर-शोर से उठती है, लेकिन वक्त के साथ वह हल्की पड़ जाती है। पुलिस तो किसी तरह का बजट न होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लेती है। डकैती की घटना के बाद पुलिस फिर से व्यापारी संगठनों को प्रेरित करने में लगी है, ताकि चौराहों पर सीसीटीवी कैमरें लगाकर आने-जाने वालों संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।
देख-रेख के अभाव में खराब हो रहे है कैमरे
मुजफ्फरनगर। नई मंडी के मुकाबले शहर के प्रमुख चौराहों शिव चौक,प्रकाश चौक, मालवीय चौक, महावीर चौक, अस्पताल तिराहे आदि पर सीसीटीवी कैमरे लगे है। इनमें से कुछ कैमरे सीधे तौर पर कंट्रोल रूम से जुड़े है, जबकि कुछ कैमरे एमडीए और नगर पालिका के है। बड़ी बात यह है कि सीसीटीवी कैमरों की देख-रेख के लिए कोई बजट ना होने के कारण एक-एक कर कुछ कैमरे खराब हो चुके है, जिन्हें ठीक कराने की फुर्सत किसी विभाग के पास नहीं है।
गांधी कालोनी में 80 कैमरों का प्रस्ताव
मुजफ्फरनगर। गांधी कालोनी हाउसिंग सोसाइटी ने सुरक्षा की दृष्टि से नई पहल शुरू की है। सूत्रों की माने तो पूरे गांधी कालोनी को हाईटेक करने की तैयारी है। इसी कड़ी में करीब 80 सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रस्ताव है, जिसके बजट को लेकर अभी मंथन चल रहा है।
पुलिस ने तैयार किया 200 कैमरों का प्रस्ताव
मुजफ्फरनगर। पुलिस ने शहर कोतवाली, सिविल लाइन और नई मंडी क्षेत्र में करीब दो सौ सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव ने सुरक्षा की दृष्टि से शहर के तीनों थाना क्षेत्रों के प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रस्ताव मांगा था। इसके बाद करीब दो सौ कै मरे लगाने पर सहमति हुई थी, लेकिन बजट की कमी के चलते सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना अभी परवान नहीं चढ़ सकी है।
हाईटेक कैमरों के लिए पुलिस मुख्यालय को भेजा प्रस्ताव
मुजफ्फरनगर। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से शहर के तीनों थाना क्षेत्र में करीब 200 कै मरे लगाने का प्रस्ताव तैयार कर पुलिस मुख्यालय को भेजा गया है, ताकि अतिरिक्त बजट स्वीकृत कराया जा सके। वो लगातार पुलिस मुख्यालय के संपर्क में है, ताकि कार्रवाई को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके। पुलिस अधिकारियों की माने तो आपराधिक घटनाओं में बदमाशों तक पहुंचने में कैमरों की बड़ी मदद मिलती है। हाई क्वालिटी के कैमरों से बदमाशों की पहचान के अलावा उनके वाहन का नंबर आसानी से पता चल जाता है। ऐसे में बदमाश ज्यादा दिन तक कानून से नहीं भाग पाता है। दूसरा सीसीटीवी कैमरे लगने से अपराध की संभावना भी कम हो जाती है। ऐसे में लोगों को आगे आकर सीसीटीवी कैमरे लगाने चाहिए, ताकि अपराधियों के मंसूबों पर पानी फेरा जा सके।
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