मुजफ्फरनगर, 24 दिसंबर (बु.)। शुकतीर्थ में गंगा तट पर चल रही श्रीराम कथा के पांचवे दिन कथा व्यास मोरारी बापू ने मानस माल्यावंत के अंतर्गत पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के चरित्र पर प्रकाश डाला व भावविभोर भजनों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। शुकतीर्थ में गंगा के तट पर चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन मोरारी बापू ने कहा कि सुखदेव जी अपनी माता के गर्भ से पैदा हुए थे और कई रूपों में उपनयन या किसी भी अन्य संस्कार से पहले छोड़ दिए गए थे। सुखदेव जी से वृक्ष और लताएं जवाब देती है कोई कहता है कि वृक्ष क्यों प्रतिक्रिया करता है जैसे ही वक्ता के होंट हिलते हैं वैसे ही गुरबाणी गुरु कृपा सुख भी हर निर्जीव के दिल में निहित है इसलिए शुक जवाब देते हैं कि पांच प्रकार के सूखे जैसे कि विश्वानंद भोगानंद आदि लेकिन साधक के लिए दो प्रकार के सूख है ब्रह्मानंद और परमानंद दोनों के बीच क्या अंतर है ब्रह्मानंद तब होता है जब कोई साधक ब्रह्म को याद करता है या ब्रह्म उनकी याददाश्त खोलता है और साधु उसे अनुभव करता है लेकिन साधू अपने गुरुओं को याद करता है और एहसास आनंदित होता है आनंद में गद गीरा नीरा बहै नीरा ए की स्थिति है।
गीता जी कहती है कि संघ काम पैदा करता है और काम क्रोध पैदा करता है लेकिन फकीरों की संगति से राम चमकते हैं एक सत्संग में समय स्थिर हो जाता है समय सारणी नहीं समय रुक जाता है वहीं लक्ष्मण धर्म है शत्रुघ्न अर्थ है यह समझने के लिए राम तो स्वयं मोक्ष है लेकिन भरत काम करते हैं थोड़ा गुरु की कृपा चाहिए। जहां हृदय ब्रह्म का अनुसरण करता है वही ब्रह्मानंद है जो थोड़ा कठोर है लेकिन परमानंद तीसरा प्रेम है। मोरारी बापू कहते हैं कि सबसे ऊंचा धर्म ही परोपकार है कथा में जो ग्रहणशील लगता है उसे ग्रहण कर लो लेकिन भार नहीं बनना है मनुष्य का अंतिम कर्तव्य कृष्ण नाम ही है मनुष्य को अंत समय में भी भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करना चाहिए वितरण करने वाले महापुरुषों में सर्वोपरि है।



