लखनऊ, 17 दिसंबर (बु.)। प्रयागराज में कुंभ-2019 की सफलता के बाद अब प्रदेश सरकार माघ मेले में भी कुंभ की तरह स्वच्छ गंगाजल ममुहैया कराने जा रही है। इसके लिए प्रदेश सरकार व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंगा एक्शन प्लान तैयार कर काम भी शुरू कर दिया है। गंगा नदी से जुड़े 22 जिलों में टास्क फोर्स गठित कर दी गई हैं। गंगा नदी में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को बंद किया जाएगा। उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश की सीमा पर दोनों प्रदेशों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड संयुक्त निगरानी करेंगे। उत्तराखंड से आने वाली कोसी व ढेला नदी की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। माघ मेला का पहला स्नान मकर संक्रांति पर और आखिरी स्नान महाशिवरात्रि पर होगा। माघ मेले के दौरान गंगा जल की शुद्धता के लिए सरकार ने कई उपाय किए हैं। गंगा व उसकी सहायक नदियों में पानी की उपलब्धता के लिए टिहरी बांध से मेले की अवधि में सतत जल प्रवाह सुनिश्चित कराने के लिए मुख्य सचिव ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। इसके साथ ही प्रदूषणकारी उद्योगों की गंदगी हर हाल में नदियों में न बहाने के लिए कहा है। गंगा किनारे के 22 शहरों में प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान नदी के जल की गुणवता सुनिश्चित करने के लिए उद्योग रोस्टर के अनुसार बंद किए जाएंगे।



