हरियाणा, 9 दिसंबर(बु.)। कृषि कानूनों को लेकर किसानों का 14वें दिन भी धरना प्रदर्शन लगातार जारी रहा। वहीं अगर किसान आंदोलन की बात करे तो इसका असर आम नागरिकों से लेकर बड़े-बड़े उद्योपतियों पर तो पड़ ही रहा है लेकिन अगर देखा जाए तो सबसे ज्यादा किसान आंदोलन का असर किसानों पर ही पड़ता नज़र आ रहा है। किसान अपनी गोभी की फसल को खेत में ही मिट्टी में रहा है। दरअसल किसान आंदोलन के चलते दिल्ली के कई रास्ते बंद है। जिससे दिल्ली मंड़ी में किसानों की सब्जियां नही जा रही है और इस कारण पिछले दस दिनों से वे इन्हें स्थानीय मंडियों में ले जा रहे हैं। यमुनानगर वाले अंबाला तक लेकर पहुंच जा रहे हैं तो पानीपत वाले रोहतक तक, लेकिन स्थानीय मंडियों में इतनी खपत नहीं है। सो, उन्हें माटी के मोल बेचना पड़ता है। भाड़ा भी नहीं निकलता। इसलिए वे भी सोचते हैं कि माटी के मोल देने की अपेक्षा खेत की माटी में ही मिला देना अधिक अच्छा है। भाड़ा तो बच जाएगा।वैसे गोभी केवल सब्जी उत्पादक किसानों की ही खोदी जा रही हो ऐसा नहीं है। हरियाणा के चाहे बड़ी जोत वाले किसान हों या लघु और सीमांत किसान गोभी तो सबकी खोदी जा रही है, पर उन्हें महसूस नहीं हो रहा है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब के किसानों की हरियाणा में दिल्ली सीमा पर डेरा जमवाने की कामयाब योजना बनाकर इसकी मुकम्मल व्यवस्था कर रखी है। विचारणीय है कि स्वामीनाथन समिति की रिपोर्ट के अनुसार देश में 83 प्रतिशत किसानों के पास दो हेक्टेयर या उससे कम कृषि भूमि है। हरियाणा भी देश से अलग नहीं है और यहां भी यही स्थिति है। दूसरी तरफ आंदोलन चला रहे पंजाब के बड़े किसान हैं, लेकिन किसान एकता के नाम पर हरियाणा के किसान भी भावुकता में उनका समर्थन कर रहे हैं।




