लखनऊ, 01 दिसम्बर (बु.)। सरकार द्वारा गंगा को प्रदुषण मुक्त करने की तमाम कोशिशों के बावजूद गंगा में प्रदूषण थम नहीं रहा है बीते दो वर्षों के अंतराल में 30 मॉनीटरिंग स्थलों में से 28 में प्रदूषण की स्थिति खराब हुई है। गंगा की जल धारा में मल जनित व अन्य जीवाणुओं की भरमार है। वहीं, 13 जगहों पर बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) मानक सीमा से अधिक पाया गया है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा गंगा के प्रदूषण पर नजर रखने के लिए बिजनौर से गाजीपुर तक 30 मॉनिटरिंग स्थल स्थापित किए गए हैं। बोर्ड द्वारा अक्टूबर महीने में की गई गुणवत्ता जांच में गढ़मुक्तेश्वर के ब्रिज घाट व बदायूं के कछला घाट में जल गुणवत्ता ‘बी’ श्रेणी में मिली। यानी बोर्ड द्वारा तय मानकों के अनुसार यहां पानी आचमन व नहाने के लायक है। बताया जा रहा है की संगम नगरी प्रयागराज के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम स्थलों पर गंगा की गुणवत्ता में थोड़ा सुधार पाया गया, जहां जीवाणुओं की तादाद में कमी आई है। हालांकि मानकों के लिहाज से यहां की गुणवत्ता अभी भी ‘सी’ श्रेणी में ही है।




