लखनऊ,01 दिसम्बर (बु.)। जिस तरह मौजूदा साल कोरोना के लिए हमेशा काली तारीख बनकर इतिहास में दर्ज रहेगा, वैसे ही यह वर्ष पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार के फैलते घुन और उसकी सफाई के लिए उठ रहे कदमों के लिए भी याद किया जाएगा। भ्रष्टाचार व लापरवाही के संगीन आरोपों से घिरे अफसरों के साथ ही अधीनस्थ पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई का चाबुक लगातार चल रहा है।

वहीं उत्तर प्रदेश के महोबा के निलंबित एसपी मणिलाल पाटीदार क्रशर कारोबारी की मौत के मामले में न सिर्फ भगोड़ा घोषित हैं, बल्कि पुलिस उनकी सरगर्मी से तलाश भी कर रही है। भ्रष्टाचार के संगीन मामले में डीआइजी अरविंद सेन और डीआइजी दिनेश चंद्र दुबे निलंबित किए जा चुके हैं। कानपुर के बहुचर्चित बिकरू कांड में पुलिसकर्मियों ने ही खुद अपनों की ही मुखबिरी की और पूरे महकमे को शर्मसार किया। ऐसी घटनाओं के बाद सूबे में पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई का दायरा बढ़ा है। इस वर्ष एक जनवरी से 31 अक्टूबर के बीच भ्रष्टाचार की शिकायतों पर पुलिसकर्मियों के विरुद्ध 42 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। जिस तरह मौजूदा साल कोरोना के लिए हमेशा काली तारीख बनकर इतिहास में दर्ज रहेगा। कांड में एसआइटी की जांच में सामने आया था कि कई मुकदमों में पुलिस ने मनमानी कार्रवाई की थी। पुलिस पर विवेचना में खेल करने के गंभीर आरोप भी लगातार लगते रहे हैं। ऐसे मामलों में वर्ष 2019 में 1156 दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई थी, जबकि इस वर्ष 1675 दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई गई है।




