हरियाणा, 25 जनवरी (बु.)। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में होने वाली किसानों की ट्रैक्टर रैली को लेकर हरियाणा पुलिस की मुश्किलें बढ़ गई हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिए हैं कि ट्रैक्टर रैली को रोकने के लिए पुलिस को कोई गाइडलाइन जारी न की जाए, लेकिन साथ ही कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए हरसंभव इंतजाम करने को कहा है। हरियाणा सरकार की चिंता है कि जो ट्रैक्टर दिल्ली मार्च कर रहे हैं, वह यदि रास्ते में खराब हो गए तो उन्हें कैसे ठीक कराया जाएगा। इन खराब ट्रैक्टरों की वजह से न केवल सड़कों पर, बल्कि दिल्ली में भी जाम के हालात पैदा हो सकते हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल अपने विभागीय अधिकारियों से फीडबैक हासिल करने के बाद लगातार केंद्र को रिपोर्ट दे रहे हैं। खुफिया एजेंसियों ने सरकार को सूचना दी है कि ट्रैक्टरों को दिल्ली की तरफ बढ़ने से रोकना किसी सूरत में उचित नहीं होगा। उनकी चिंता है कि यदि ट्रैक्टर दिल्ली में घुस गए और वहां उनमें किसी तरह की खराबी आती है अथवा किसान वापस नहीं लौटते, तब उस स्थिति में सरकार के सामने किस तरह के विकल्प होंगे। किसान आंदोलन का पूरा संचालन किसान संगठनों की संयुक्त समन्वय समिति के हाथों में हैं। इस समन्वय समिति में सात सदस्य हैं। भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी कांग्रेस व आप तथा शिव कुमार कक्का भाजपा की विचारधारा के किसान नेता हैं। बाकी पांच सदस्य कम्युनिस्ट-वामपंथी विचारधारा के पक्षधर हैं, इसलिए खुफिया एजेंसियों ने सरकार को रिपोर्ट दी है कि यह आंदोलन पूरी तरह से वामपंथी विचारधारा के हाथों में है, जिसको कांग्रेस का समर्थन मिल रहा है।




