छत्तीसगढ़, 18 जनवरी (बु.)। भगवान के मंदिर के बारे में आपने खुब सुना है लेकिन क्या कभी आपने सास के मंदिर के बारे में भी सुना है। जी हां हम बात कर रहे है छत्तीसगढ़ के एक सास के मंदिर के बारे में। यहां बिलासपुर में एक ऐसा भी परिवार है, जिनकी बहुओं को अपनी सास से इतना प्रेम था कि उनके देहांत के बाद उनकी यादों को संजोए रखने के लिए सास का मंदिर बनवा लिया। इतना ही नहीं वे रोज उनकी पूजा करने के साथ आरती भी उतारती हैं। माह में एक बार मंदिर के सामने बैठकर भजन-कीर्तन करतीं हैं। सास-बहुओं के बीच ऐसा प्रेम शायद ही आपने कहीं और देखा होगा। बिलासपुर जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर बिलासपुर-कोरबा मार्ग पर रतनपुर में यह मंदिर 2010 से बना है। रतनपुर में महामाया देवी का मंदिर विश्वप्रसिद्ध है। यहां पर रिटायर्ड शिक्षक शिवप्रसाद तंबोली का 39 सदस्यों वाला संयुक्त परिवार है। उनकी 11 बहुएं हैं। बहुओं की सास गीता देवी का 2010 में स्वर्गवास हो गया, वे जीवित थीं तो बहुओं से अगाध प्रेम करती थीं। उन्हें अपनी बेटियों की तरह स्नेह करती थीं। बहुओं को पूरी आजादी दे रखी थी। गीता को भी ये संस्कार अपनी सास से मिले थे। उनके जमाने में सास-बहुओं के झगड़े चरम पर थे, पर वे अपनी बहुओं को एकता का पाठ पढ़ाती थीं। बहुओं को भी उनसे कभी शिकायत नहीं रही। गीता के पति शिव प्रसाद कहते हैं कि गीता के अच्छे संस्कार और धार्मिक सदाचार ने ही आज तक परिवार को जोड़कर रखा है। तंबोली परिवार को उनसे बिछडऩे का आज भी बहुत दुख है। उनका मानना है कि गीता देवी के प्रयासों से ही परिवार में सुख, समृद्धि और एकता है।



