- शुक्रवार मध्य रात्रि से छीन जाएगा प्रधानी का ताज
- हद! 21 करोड़ की धनराशि खर्च नही कर सके ग्राम प्रधान
- राज वित्त से जारी 3 करोड़ की धनराशि पहुंची मुख्यालय
- 15वें वित्त आयोग की बाकी है अभी शेष धनराशि
मुजफ्फरनगर, 25 दिसंबर (बु.)। प्रदेश के ग्राम प्रधानों का 5 वर्षीय कार्यकाल शुक्रवार रात्रि 12:00 बजे समाप्त होने जा रहा है लेकिन अभी भी प्रदेश में ऐसी ग्रामपंचायतों की कोई कमी नहीं है जो इस बीच शासन द्वारा जारी विकास कार्यो की धनराशि को खर्च नहीं किया। प्रदेश के अन्य जनपदों की बात छोड़ दी जाए तो मुजफ्फरनगर भी इस आरोप से अछूता नहीं पाया। जहां अभी तक भी ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए आवंटित किए गए बजट का ₹21 करोड़ खर्च ही नहीं हो सका है। अब शुक्रवार को समयावधि समाप्त होने पर शासन स्तर से ग्राम पंचायतों पर प्रकाश प्रशासकों की नियुक्ति होने के बाद शेष धनराशि का जरूरत के हिसाब से ही खर्च किया जा सकेगा। उत्तर प्रदेश में कड़ाके की ठंड में जारी शीतलहर के 20 ग्राम पंचायतों की राजनीति में भूचाल का आगाज होने जा रहा है। ऐसे हालातों में पंचायती राज विभाग में प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद पंचायत चुनाव होने तक नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारी कर ली है। प्रदेश की ग्राम पंचायतों में 25 दिसंबर यानी शुक्रवार की मध्यरात्रि से ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा हालांकि मुख्यालय पर अभी कोई स्पष्ट आदेश शासन स्तर से नहीं मिला है कि प्रधानों का चार्ज किस स्तर से अधिकारी को सौंपा जाएगा पर संभावना है कि ब्लॉक के एडीओ पंचायत को ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक अधिकार मिलेंगे। उधर अगले वर्ष 18 जनवरी को प्रदेश के जिला पंचायत अध्यक्ष और 25 जनवरी को तमाम ब्लाक प्रमुख का कार्यकाल खत्म हो जाएगा। इन्ही कवायदों के बीच पंचायती राज निदेशक किंजल सिंह ने सभी जिलाधिकारियों को आदेश भी जारी करते हुए कहा शुक्रवार रात से प्रधानों के खाते पर रोक लगा दी जाए। हालांकि ग्राम प्रधान संगठनों ने कार्यकाल और बढ़ाने की मांग की थी और मुख्यमंत्री को भी ज्ञापन भेजा गया था। उक्त मामले में ग्राम प्रधान संगठनों का कहना था कि जब तक पंचायत चुनाव नहीं होते तब तक मौजूदा ग्राम प्रधानों से ही ग्राम पंचायतों का संचालन कराया जाए। इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी डॉ एसके श्रीवास्तव ने गुरुवार को बताया कि उत्तर प्रदेश के अन्य जनपदों के साथ मुजफ्फरनगर की 498 ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल शुक्रवार को समाप्त हो रहा है लेकिन अभी भी जनपद के विकास कार्यों के लिए आवंटित किए गए बजट का करीब 21 करोड़ रूपये खर्च बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों में नहीं हो सका है हालांकि जिले में चुनाव की तारीखों का ऐलान होने तक इन तमाम गांव में प्रस्तावित कार्य होते रहेंगे। इसके लिए एडीओ पंचायत और ग्राम सचिव का बैंकों में संयुक्त रूप से कार्य करेगा। उन्होंने बताया कि मुजफ्फरनगर जनपद की 498 ग्राम पंचायतों में मात्र 20 गांव ही गांव में चुनाव आचार संहिता लागू होने तक कार्य कराए जा सकेंगे लेकिन प्रशासकों की नियुक्ति होने के बाद अब प्रधान की तरह ही प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होगी। उन्होंने बताया कि जिले में समय बीतता देख कुछ ग्राम पंचायतों में तेजी से कार्य कराया गया है। ग्राम पंचायत चुनाव की घोषणा होने तक ग्राम पंचायतों में पूर्व में प्रस्तावित हुए विकास कार्य एडीओ पंचायतों की निगरानी में होंगे उनके साथ पंचायत सचिवों का भी एक सहयोग रहेगा। आपको बता दें कि कोरोना संक्रमण के कारण त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव इस बार वक्त से ही संपन्न नहीं कराया जा सकेगा। अब प्रदेश की योगी सरकार नई व्यवस्था के बीच मार्च में चुनाव कराने के मनोयोग से जुटी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार प्रदेश में जहां एक और ग्राम पंचायतों व वार्डो के परिसीमन का कार्य अंतिम चरण में है तो वहीं जल्द आरक्षण का फार्मूला भी तय कर लिया जाएगा। उम्मीद है कि फरवरी के दूसरे सप्ताह तक ग्राम सभाओं को वह आरक्षण भी पता चल जाएगा। वहीं जिला पंचायत वालों के आरक्षण की जानकारी फरवरी के तीसरे सप्ताह में मिल जाएगी। पिछली बार ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सदस्य के चुनाव एक साथ हुए थे। क्षेत्र पंचायत सदस्य जिला पंचायत सदस्य के चुनाव अलग से हुए थे इस बार समय बचाने के लिए चारों पदों के चुनाव एक साथ कराने की तैयारी है। कोशिश है कि 31 मार्च तक चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।



