दिल्ली, 07 दिसंबर(बु.)। कृषि कानून को रद्द करने री मांग को लेकर हरियाणा, पंजाब, राजस्थान समेत कई राज्यों के किसान राजधानी दिल्ली के कई बॉर्डर पर जमा है और सरकार से अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए लगातार आंदोलन कर रहे है। वहीं इस किसान आंदोलन के पीछे के कई रहस्य धीरे-धीरे सामने आने लगे हैं। जानकारों की मानें तो दिल्ली-सोनीपत स्थित सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन भले ही किसानों के नाम पर चल रहा हो, लेकिन यहां लगे विदेशी सिख संगठनों के स्टॉल पर्दे के पीछे की कहानी बयां कर रहे हैं। बताया जा रहा है की इस आंदोलन को विदेशी फंडिंग से भी पूरी मजबूती मिल रही है। आंदोलनकारियों की मदद में विदेशी सिख संगठन ही नहीं, बल्कि एनआरआइ सिख भी जुटे हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, खुफिया विभाग समेत कई सुरक्षा एजेंसियां इस तरह की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। जिस तरह से सिंघु बॉर्डर पर खड़ी ट्रैक्टर ट्रॉलियों में जिस तरह से अनाज, सब्जियां, पानी की बोतलें, फल, बिस्कुट, गैस सिलेंडर, गर्म कपड़ों समेत जरूरत का हर सामान भरा हुआ है, उससे भी इस बात को बल मिलता है कि आंदोलन के लिए किसानों को भारी-भरकम फंडिंग हो रही है। वहीं पुलिस का कहना है की अन्य आंदोलन की तरह कृषि कानूनों के विरोध के नाम पर चल रहे इस आंदोलन की फंडिंग पर भी नजर रखी जा रही है। अगर कोई गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आंदोलन में शामिल विभिन्न संगठनों की निगरानी जारी है।




