दिल्ली, 6 दिसंबर (बु.)। कृषि कानून को लेकर हो रहे किसान आंदोलन को लेकर अब बीजेपी भी सतर्क हो गई है। जिसके चलते बीजेपी के कार्यकर्ता किसान के बीच जाकर उन्हे कृषि कानून के फायदे समझा रही है। जिसके लिए बीजेपी पार्टी ने सोशल मीडिया का भी सहारा लिया। दरअसल कृषि कानूनों को लेकर किसानों के प्रदर्शन के मद्देनजर भाजपा भी सतर्क हो रही है। दिल्ली में किसानों के बीच जाकर पार्टी के नेता उन्हें कृषि कानूनों के फायदे बता रहे हैं। इसके साथ ही इंटरनेट मीडिया का भी सहारा लिया जा रहा है। ट्विटर और वाट्सएप के जरिये भाजपा सांसद और नेता लोगों को जागरूक कर रहे हैं। वीडियो शेयर करके भी बताया जा रहा है कि किस तरह के नए कानून किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। विरोधियों को जवाब भी दिया जा रहा है। भाजपा का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के नाम पर किसानों को गुमराह किया जा रहा है। इन लोगों की मंशा क्या है यह जानने की जरूरत है, क्योंकि नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीदारी हुई है। वहीं भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर नए कृषि कानून किसान विरोधी हैं तो पूरे देश में इनका विरोध क्यों नहीं हो रहा? महाराष्ट्र से लेकर उत्तर प्रदेश और गुजरात से लेकर बिहार तक देशभर के किसानों ने नए कानून का स्वागत किया है। नए कृषि कानूनों को पंजाब सरकार ने लागू नहीं किया है। फिर भी वहां के किसान ही विरोध प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं? कहीं, इसके पीछे किसी की साजिश तो नहीं है। केंद्र सरकार की एजेंसियों द्वारा अब तक 315 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की एमएसपी पर खरीद की गई जिसमें से 202 लाख मीट्रिक टन धान केवल पंजाब में खरीदा गया। यह पूरी खरीद का 64.18 फीसद है। इसके बावजूद पंजाब में सबसे ज्यादा हंगामा होने से लगता है कि कुछ लोग साजिश कर रहे हैं।



