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नई दिल्ली, 03 दिसम्बर। तो क्या? 05 दिसम्बर तक खुले आसमान के नीचे यूँही बैठे रहेंगे किसान।
चौथे दौर की वार्ता भी लगभग बेनतीजा ही साबित हुई है क्योंकि किसानों की मांगों को फिर से सिर्फ़ सुना गया है उनपर अमल करने के लिए या ये कहे कि जिस बिल का विरोध किसान कर रहे है उसको ख़त्म करने के लिए सरकार ने अपना रुख़ अभी भी साफ़ नही किया है।
कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन जारी है। किसानों के भ्रम को दूर करने के लिए सरकार जुटी हुई है। इसी कड़ी में गुरुवार को सरकार और किसान संगठनों की बैठक हुई। दिल्ली के विज्ञान भवन में दोपहर 12 बजे शुरू हुई ये बैठक करीब साढ़े सात घंटे चली। अब 5 दिसंबर को एक बार फिर सरकार और किसानों की बातचीत होगी। मतलब साफ़ की अब दो दिन 05 दिसम्बर तक किसानों को खुले आसमान के नीचे बैठे रहना होगा। क्योकी किसान अपनी मांगों पर अभी भी अड़ियल रुख़ अख़्तियार कर बैठा है।