मुजफ्फरनगर, 6 जनवरी (बु.)। डॉग की महंगी नस्ले चोरों के निशाने पर है। शहर में लगातार डॉग और उसके बच्चों की चोरी की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है क्योंकि चोर अच्छी नस्ल के डॉगों के मुंह मांगे दाम वसूल रहे हैं। पुलिस भी लंबे समय से सक्रिय गैंग पर शिकंजा नहीं कस पाई है। घरों की सुरक्षा को रखे जाने वाले डॉग भी अब सुरक्षित नहीं रह गए। वैसे जिले भर में डॉग के शौकीनों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है खासतौर से विदेशी नस्ल के डॉग को पालने का प्रचलन शहर से लेकर देहात तक बढ़ गया है। पहले सुरक्षा और वफादारों के लिहाज से देसी नस्ल के डॉग को तवज्जो दी जाती थी लेकिन अब डॉग की महंगी नस्ल हर किसी की पसंद बन गई। डॉग के छोटे बच्चों को महंगे दामों में लाकर उन्हें पाला जा रहा है जिन पर हर माह हजारों रुपए खर्च हो रहे हैं। काफी परिवारों में उन्हे परिवार के सदस्यों का दर्जा दिया गया है। डॉग की बॉक्सर जर्मन शेफर्ड लेब्रा डॉग आदि पर चोरों की नजर है। बाकायदा चोर डॉग की आदतों पर कुछ देर में अध्ययन कर उन्हें अपने वश में कर लेते हैं।

शहर के साउथ सिविल लाइन में एक डॉग चोरी की घटना सीसीटीवी में कैद हुई है। उसमें चोर बॉक्सर डॉग कोई वस्तु खिलाने के बहाने अपने वश में करने की कोशिश करता है एक बार चोर के झांसे में आकर कुछ दूर उसके पीछे चल देता है। फिर डॉग को गलती का एहसास होता है और वह चोर का साथ छोड़कर वापस अपने घर आ जाता है। चोर भी अपना प्रयास जारी रखता है और वापस आता है पहले वह डॉग पर हाथ फिरता है और फिर उसे गोद में उठाकर ले जाता है। इस बार डॉग किसी तरह का प्रतिरोध नहीं करता। चोरी की दूसरी वारदात मंडी के साईं विहार में हुई है। वीगल ब्रीड का 7 साल का यह डॉग अपने घर के बाहर घूमते समय गायब हो गया। डॉग के गायब होने से पूरा परिवार बेचैनी में है। शौकीन सुनील कुमार का कहना है कि डॉग का रखरखाव परिवार के सदस्य की तरह करना पड़ता है। सुख सुविधाओं के साथ उसकी सुरक्षा पर भी फोकस जरूरी है क्योंकि डॉग चुराकर उन्हें बेचने वालों का नेटवर्क काफी समय से सक्रिय है कई मामलों में मुकदमे दर्ज हुए लेकिन सार्थक नतीजा सामने नही आया है।




