दिल्ली, 5 जनवरी (बु.)। केंद्र सरकार के साथ सोमवार को हुई किसान नेताओं की वार्ता का भी कोई नतीजा नहीं निकला है। अब अगले दौर की बातचीत 8 जनवरी को होगी। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से बार-बार समझाने के बावजूद किसान नेता तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को रद करवाने की जिद पर अड़े हुए हैं। इस वजह से सैकड़ों लोग बेरोजगार हो गए हैं। फैक्ट्रियां बंद होने लगी हैं और लोगों के सामने रोजी-रोटी के भी लाले पड़ने लगे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर को ही अब तक तकरीबन 30,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। गौरतलब है कि सिंघु बॉर्डर पर एक महीने से ज्यादा समय से पंजाब और हरियाणा के किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। इस वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई किलोमीटर तक किसानों के ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़े हैं। नतीजतन दिल्ली की फैक्टियों में कच्चे माल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। कच्चा माल न होने से बवाना, नरेला की काफी फैक्टियां बंद हो गई हैं। इस वजह से सैकड़ों लोग बेरोजगार हो गए हैं। काफी लोग तो ऐसे हैं, जिनको उम्मीद थी कि सोमवार को किसानों का प्रदर्शन खत्म हो जाएगा, लेकिन वार्ता किसी नतीजे पर न पहुंचने की वजह से उनमें अब ज्यादा खौफ का माहौल है। काम न होने के बावजूद उन्हें घर का किराया देना पड़ रहा है। इसके अलावा काफी लोग ऐसे भी हैं, जिनकी दुकानें प्रदर्शन की वजह से बंद हैं। ये लोग भी प्रदर्शन के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं।



