- रात्रि में विश्राम को आने वाले लोगों के ऊपर गिरता है पानी
- अधिकारियों को शिकायत के बाद भी समस्या से नही मिल पाई निजात
- रैन बसेरे में ठहरे लोगों ने ऊपर से गिरने वाले गंदे पानी पर जताई नराजगी50 बैड़ की सुविधा तो है, मगर
- कड़ाके की ठंड के बावजूद भी 25 से 30 लोगों से ज्यादा नही हो रही उपस्थिति
मुजफ्फरनगर, 23 दिसंबर (बु.)। बेघर लोगों को कोहरे पाले और ठंड से बचाने को खोले गए रैन बसेरे में टॉयलेट बाथरूम से टपकने वाला गंदा पानी बेसहारा लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। अधिकारियों के भ्रमण के दौरान यह मामला उछलने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। लगातार गंदा पानी गिरने के कारण रैन बसेरे में अजीब सी बदबू बन गई है। दूसरा कड़ाके की ठंड होने के बावजूद रैन बसेरे के 50 बेड पूरी तरह से नहीं भर पाए हैं जबकि बाहर कई लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है। बुलेटिन की टीम ने रात रैन बसेरे की व्यवस्था और बेघर लोगों की उपस्थिति का जायजा लिया। कोरोना वायरस की गाइडलाइन के बीच अधिकांश लोगों को रैन बसेरे में एंट्री नहीं मिलती है। बेघर लोगों से बातचीत में यह तथ्य सामने आया है कि रेलवे स्टेशन पर रैन बसेरे में 50 बेड की सुविधा है लेकिन रात में 21 लोग ही बेड पर सोते पाए गए। वहीं कैमरे की चमक पर जागे यात्रियों ने अवस्थाओं को लेकर सवालों की झड़ी लगा दी। बड़ी समस्या बाथरूम के गंदे पानी की थी। एक बुजुर्ग बुलेटिन टीम को सीधे बाथरूम ले गए जहां लगातार गंदा पानी बरस रहा था। यात्रियों का कहना था कि टॉयलेट बाथरूम जाने की स्थिति में गंदा पानी उनके ऊपर गिरता है। दरअसल रैन बसेरे में संयुक्त रूप से टॉयलेट और बाथरूम बनाए गए हैं। जिनकी छत पूरी तरह से जर्जर स्थिति में है पानी की पाइप लाइन लीक होने के कारण पानी लगातार छत से टपकता रहता है। टॉयलेट और बाथरूम जाने की स्थिति में गंदा पानी संबंधित व्यक्तियों के ऊपर गिरता है। लगातार पानी टपकने के कारण रैन बसेरे में अजीब सी बदबू भी वातावरण में खुल गई है। दूसरा कोरोना गाइडलाइन के मुताबिक रैन बसेरे में किसी तरह के सैनिटाइजर आदि की व्यवस्था भी नहीं है। कड़ाके की ठंड बढ़ने के साथ ही कई अधिकारी रैन बसेरे का भ्रमण कर चुके हैं लेकिन टॉयलेट और बाथरूम की छत से पानी टपकना बंद नहीं हुआ है। वहीं बुलेटिन टीम की रियलिटी चेक के दौरान रैन बसेरे के बाहर कई लोग सोते पाए गए। उनका कहना था कि बेड खाली होने के बावजूद एंट्री नहीं दी जाती है। मजबूरन वह बाहर सोने को मजबूर है। उधर रोडवेज बस स्टैंड के पास बना पुराना रैन बसेरा बदहाल स्थिति में मिला। वहां सोते हुए मिले बुजुर्ग ने बताया कि जर्जर होने के कारण यह तो एक तरह से बंद है। यहां कोई इंतजाम नहीं है मजबूरी में इसे अस्थाई ठिकाना बना रखा है।



