बरेली, 9 दिसंबर(बु.)। अब गौवंशीय पशुओं के साथ दूसरे पशुओं के मांस की पहचान करना आसान हो जाएगा। इसके लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आइवीआरआइ) के पशुधन उत्पादन प्रौद्योगिकी विभाग ने ‘फूड एनीमल स्पेसीज आइडेंटिफिकेशन किट’ (खाद्य पशु प्रजाति पहचान किट) तैयार की है। डीएनए विधि के जरिए इस किट की मदद से भैंस, सूकर के साथ-साथ गौवंशीय मांस की पहचान आसानी से की जा सकेगी। आइवीआरआइ बुधवार को अपने 131वें स्थापना दिवस के मौके पर इस टेक्नोलॉजी को रिलीज करेगा। भारत में मवेशियों की करीब 40 ब्रीड है। कई बार मांस की बिक्री को लेकर बाजार में गौवंशीय मांस को शामिल किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसकी जांच के लिए अभी तक भारत में कोई भी टेक्नोलॉजी नहीं बन पाई थी। जिसकी वजह से कोरिया अन्य विदेशी कंपनियों की किट से घोड़ा, कुत्ता, बकरी आदि के मांस की पहचान की जाती है।



