अयोध्या, 7 दिसंबर(बु.)। राम की जन्मभूमि अयोध्या का शाब्दिक अर्थ है, जो युद्ध से मुक्त हो या जिसे जीता न जा सके। इस विरासत पर रामनगरी रविवार को खरी उतरी। गत वर्ष नौ नवंबर को सबसे बड़े विवाद का फैसला आने और मंदिर निर्माण की तैयारियों के साथ अयोध्या अपने दायरे में ही नहीं पूरे देश में ‘अयुद्ध’ की अपनी विरासत के साथ चमकी और रविवार को विवादित ढांचा ढहाये जाने की 28वीं बरसी पर भी रामनगरी विवाद से विमुख हो मौलिक पहचान के साथ रोशन हुई। जिस कारसेवकपुरम में ध्वंस के बाद प्रत्येक वर्ष शौर्य दिवस का आयोजन कर ढांचा ढहाने की याद ताजा की जाती थी, वहां सन्नाटा था। सरगर्मी को पीछे छोड़ विहिप प्रवक्ता शरद शर्मा कारसेवकपुरम के कुछ ही फासले पर मणिरामदासजी की छावनी के सामने मिलते हैं। शर्मा कहते हैं, सुप्रीम फैसला आने के बाद मंदिर निर्माण ही असली शौर्य है। ढांचा ढहाये जाने की बरसी से उपजने वाली सरगर्मी से बेफिक्र पड़ोस के टांडा कस्बे के निवासी अनिल गुप्त मय परिवार के न्यास कार्यशाला में मंदिर निर्माण की संभावनाएं परख रहे होते हैं। कानून-व्यवस्था की दृष्टि से संवेदनशील इस तारीख को परिवार सहित अयोध्या आने में डर नहीं लगा।




