वाराणसी, 1 जनवरी (बु.)। नववर्ष 2021 खगोलीय दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है। इस वर्ष में कुंडली में शुभ योगों के कारण भारत की विश्व पटल पर चारों तरफ जय-जयकार होगी। विश्व पटल पर वर्ष 2021 में चार ग्रहण लगेंगे। इसमें दो चंद्रग्रहण व दो सूर्य ग्रहण होंगे। खास यह कि भारत में सिर्फ दो चंद्रग्रहण दिखाई देंगे। यह पूर्वोत्तर भारत के कुछ भागों में अल्पकाल के लिए दृश्यमान होगा।श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर कार्यपालक समिति के पूर्व सदस्य ख्यात ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार वर्ष का पहला ग्रहण वैशाख पूर्णिमा 26 मई 2021 को लग रहा है। यह खग्रास चंद्र ग्रहण के रूप में चंद्रोदय के समय आंशिक रूप से भारत के कुछ हिस्सों में ही दृश्य होगा। वहीं ज्येष्ठ अमावस्या 10 जून को सूर्य ग्रहण लग रहा है जो कंकणाकृति होगा और भारत में दृश्य नहीं होगा। यह अमेरिका के उत्तरी भूभाग, एशिया के उत्तरी और अटलांटिक महासागर में दिखाई देगा। कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा दिन शुक्रवार 19 नवबंर 2021 को लगने वाला ‘खंडग्रास चंद्र ग्रहण’ भारत के सुदूर पूर्वोत्तर भाग में अल्प समय के लिए दृश्य होगा। वर्ष का आखिरी ग्रहण, खग्रास सूर्य ग्रहण मार्गशीर्ष अमावस्या शनिवार चार दिसंबर 2021 को लग रहा है जो भारत में दृश्य नहीं होगा। विश्व पटल पर यह ग्रहण आस्ट्रेलिया के अधिकतम भाग दक्षिण हिंद महासागर, अंटार्टिका, दक्षिण अफ्रीका आदि में दिखाई देगा। वहीं वर्ष 2021 विवाह लग्न की दृष्टि से भी विशेष होगा। हालांकि इसके लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। वास्तव में मकर संक्रांति को खरमास समाप्त होने के बाद लग्न मुहुर्त प्रचुर होते हैं। वहीं, इस बार शादी-विवाह मांगलिक कार्य के कारक ग्रह वृहस्पति व शुक्र के अस्त होने से नववर्ष 2021 में लग्न मुहुर्त का प्रारंभ काफी विलंब से यानी 22 अप्रैल से होगा।



