11 जनवरी (बु.)। करीब 10 महीने से लगातार देश में कोरोना का कहर जारी है। जिसके चलते सभी त्यौहारों पर कोरोना का ग्रहण लग गया था। हर साल की भाति इस बार कोई भी अपने त्यौहार एक-दूसरे के साथ मिलकर नही मना पाया। वहीं आजादी के बाद 1947 से हर साल छपते आ रहे बजट दस्तावेज पर भी कोविड-19 का ग्रहण लग गया है। इस महामारी के डर से केंद्रीय बजट 2021-22 के दस्तावेज नहीं छापे जा रहे हैं। सरकार को इसके लिए संसद के दोनों सदनों की मंजूरी मिल गई है। सभी संसद सदस्यों को इस बार बजट के दस्तावेजों की सॉफ्ट कॉपी मुहैया कराई जाएगी। ऐसे में इस बार बजट के दिन संसद के बाहर उसके दस्तावेज पहुंचाने वाले ट्रक नजर नहीं आएंगे। केंद्रीय बजट की छपाई हर साल वित्त मंत्रालय के अपने प्रिंटिंग प्रेस में होती रही है। वित्त मंत्रालय का कहना था कि बजट के दस्तावेजों की छपाई के लिए 100 से ज्यादा लोगों को दो हफ्ते तक एक ही जगह रखना होता है। कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए सरकार इतने लोगों को इतने लंबे समय तक प्रिंटिंग प्रेस में नहीं रख सकती। जानकारी के अनुसार संसद सदस्यों को मनाने में लोकसभा अध्यक्ष और उपराष्ट्रपति को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बजट के डॉक्यूमेंट्स को लेकर दो विकल्प रखे गए थे: सभी संसद सदस्यों को सॉफ्ट कॉपी दी जाए या किसी को नहीं। जो संसद सदस्य टेक सैवी नहीं हैं उनके लिए सीमित संख्या में कॉपी छापना मुमकिन नहीं था। दलील दी गई कि दस्तावेज छापे गए तो उसको लाने ले जाने में कोविड-19 के संक्रमण का जोखिम हो सकता है।



