बरेली, 13 दिसंबर,(बु.)। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के शोधार्थी अब तारों की दिशा, गृहों की चाल से लेकर खगोलीय पिंडों पर शोध कर सकेंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय ने आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंस नैनीताल के साथ एमओयू साइंन किया है। इस व्यवस्था से विश्वविद्यालय एवं सम्बद्ध कॉलेजों के शिक्षक और शोधार्थी वहां शोध के लिए जा सकेंगे और वहां के विद्यार्थी रुहेलखंड विश्वविद्यालय की लैब इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय की ओर से एक पत्र भी भेजा जाएगा। रुहेलखंड विश्वविद्यालय से सम्बद्ध 548 महाविद्यालय संचालित है। विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. अमित सिंह ने बताया कि नैनीताल में आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंस का बहुत बड़ा इंस्टीट्यूट है। इससे विश्वविद्यालय ने एमओयू किया है। यहां वेदशाला, नक्षत्रशाला के बारे में जानने और समझने के लिए टेलीस्कोप सहित सभी संसाधन मौजूद हैं। एमओयू होने से यहां के एमएससी, पीएचडी के छात्र और शिक्षक वहां जाकर शोध कर सकेंगे। छात्र खगोलीय पिंडो, धूम केतू, आकाश गंगा, सूर्य की किरणों और तारों की दिशा के बारे में भी पढ़ सकेंगे। वहां के छात्र-शिक्षक विश्वविद्यालय की लैब का इस्तेमाल कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि इस सुविधा का लाभ सम्बद्ध कॉलेज के शिक्षक व छात्र भी ले सकेंगे। इसके लिए कॉलेजों को विश्वविद्यालय में सूचित करना होगा। यहां से शोधार्थियों और शिक्षक की सूची नैनीताल में आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंस में भेजी जाएगी।इससे उन छात्रों को सुविधा होगी जो रिसर्च के क्षेत्र में कुछ करना चाहते हैं



