दिल्ली, 8 दिसंबर(बु.)। सिंघु बॉर्डर पर आंदोलनरत किसानों के बीच कोरोना से बचाव के लिए जारी स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों की खुलकर धज्जियां उड़ाई जा रही है। न तो शारीरिक दूरी का पालन किया जा रहा है और न ही किसान मास्क लगा रहे हैं। आंदोलन में काफी संख्या में बुजुर्ग किसान पंजाब से आए हैं। सर्दी में सड़क किनारे ट्रैक्टर- ट्रॉलियों में रह रहे ये किसान अब बीमार होने लगे हैं। बीमार किसानों में 70 फीसद खांसी व बुखार से पीडि़त हैं, जो कि कोरोना के प्राथमिक लक्षण हैं। बावजूद इसके यहां पर जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं सोतने वाली बात तो यह है कि दवाइयों के स्टॉल पर मास्क रहने के बावजूद भी उसका किसान उपयोग नहीं कर रहे हैं। अगर अभी भी हरियाणा व दिल्ली सरकार ने इस दिशा में ध्यान नहीं दिया तो आनेवाले दिनों में इसके दुष्परिणाम सामने आएंगे और फिर स्थिति को संभालना काफी कठिन हो जाएगा। पंजाब से आए रमनदीप सिंह ने बताया कि पिछले चार दिनों से यहां पर लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करा रहे हैं। इस दौरान करीब एक हजार किसानों को दवाइयां दी हैं। इनमें ज्यादातर किसान सर्दी, खांसी व बुखार से पीडि़त हैं। साथ ही पेट में संक्रमण व धूल के कारण किसानों को एलर्जी भी हो रही है। यहां पर स्वास्थ्य सेवाओं की समुचित व्यवस्था नहीं है। न तो कोरोना जांच हो रही है और न ही कोरोना मरीजों के इलाज के लिए आइसोलेशन की व्यवस्था है।



