अलीगढ़, 13 दिसंबर (बु.)। मरीजों के तीमारदारों के लिए सभी जिला स्तरीय अस्पतालों में रैन बसेरे बनाए गए हैं, फिर भी कड़ाके की ठंड के बीच खुले में दिन ही नहीं, पूरी रात बितानी पड़ रही है। यह समस्या जिला अस्पताल की है। यहां तीन कवर्ड व तीन खुले रैन बसेरे बनाए गए, ताकि वे आराम से रात गुजार सके। मगर कवर्ड रैन बसेरों में अस्पताल प्रबंधन ने दफ्तर और गोदाम बना दिए हैं। जिसके चलते तीमारदारों को खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ रही है। जिला अस्पताल में तीमारदारों के लिए तीन कवर्ड व तीन खुले रैन बसेरे बनाए गए, ताकि वे आराम से रात गुजार सके। कवर्ड रैन बसेरों पर थोड़े समय बाद ही अवैध कब्जे हो गए। ब्लड बैंक के पास स्थित रैन बसेरे में कई साल से स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों का स्थायी कब्जा है। दूसरा रैन बसेरा पूर्व सांसद राजकुमारी चौहान ने अपनी निधि से बनवाया था। इस पर भी लाखों रुपया खर्च हुआ था। सोमवार को दैनिक जागरण टीम ने जायजा लिया तो इसके मुख्य द्वार पर ताला लटका मिला। कुछ अस्पताल कर्मियों ने ही बताया कि इसमें कुछ अस्पताल का सामान व कुछ घरेलू समान है। कुछ कर्मचारी इसमें रहते हैं। वहीं, रैन बसेरे के पास कुछ लोग जमीन पर ही चादर बिछाकर कंबल में लिपटे नजर आए। जागरण टीम लैब के पीछे स्थित रैन बसेरे में पहुंची। मेरी सहेली योजना के तहत दफ्तर संचालित होता मिला। तीमारदार पास ही स्थित विश्राम स्थल की सीमेंटेड बेंच पर कंबल लपेटकर पड़े हुए मिले। तीसरा रैन बसेरे के बारे में पता किया तो किसी को मालूम ही नहीं था कि किधर है। फिर पता चला कि औषधि कक्ष के पास ही रैन बसेरा, जिसमें दवा व अन्य सामान रखा जाता है। अतरौली से आए कि वार्ड में एक से ज्यादा तीमारदार को रुकने नहीं दिया जाता। परसों अपना मरीज भर्ती किया। दो दिन से खुले में सोने से हालत पतली हो गई। अब सवाल ये है कि जब रैन बसेरों में दफ्तर और गोदाम बना दिए हैं तो मरीजों के तीमारदार कहां जाएं।



