दिल्ली, 22 जनवरी (बु.)। कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन का आज 58वां दिन है। किसानों की सरकार के साथ 12वें दौर की बातचीत होगी। इससे पहले बुधवार को किसानों से बातचीत में सरकार ने प्रपोजल दिया कि कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक होल्ड कर सकते हैं। इसके बाद उम्मीद जगी कि अब शायद किसान मान जाएं, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। किसान नेताओं ने गुरुवार को दिन भर बैठक करने के बाद देर रात कहा कि सरकार का प्रपोजल उन्हे मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि कानून रद्द होने चाहिए, और MSP की गारंटी मिलनी चाहिए।किसान नेताओं की बैठकों में यह चर्चा भी हुई कि सरकार को नया प्रस्ताव दिया जाए। जिसमें कानूनों को 3 साल तक होल्ड करने का हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में देने, प्रति एकड़ 3 लाख के एग्रीकल्चर लोन की लिमिट बढ़ाकर 5 लाख करने और ब्याज दर पुरानी रखने और मृतक किसानों के परिजन को मुआवजा देने की मांग शामिल हो। इस दौरान किसानों ने कहा की सरकार चाहती है कि किसी भी तरह किसान मान जाए और आंदोलन खत्म कर दे। परंतु उन्होने सरकार का प्रपोजल नामंजूर कर दिया। सरकार से आज की मीटिंग में कृषि कानूनों की वापसी और MSP पर बात करेंगे।”




