मुज़फ्फरनगर, 24 दिसंबर (बु.)। मुज़फ्फरनगर में सन 2013 में हुए साम्प्रदायिक दंगे में 65 लोगो की मौत हो गयी थी और हजारो लोग घरों से बेघर होगए थे। जिसमें दंगा पीड़ितों ने तो दंगा आरोपियों पर मुकदमें दर्ज कराये ही थे साथ मे पुलिस ने भी अपनी तरफ से दंगा भड़काने व भड़काऊ भाषण देने के मामले में आधा दर्जन से ज्यादा मुकदमे दर्ज किए थे ।जिसमें कई बीजेपी विधायको सांसदों व मंत्रियों को दंगे से पहले हुई महापंचायत में भड़काऊ भाषण देने का आरोपी बनाया था। अब बीजेपी सरकार ने इन मुकदमो को वापस लेने की कवायद शुरू कर दी है। सरकार ने केस वापसी की याचिका दी है और अभी इस पर सुनवाई बाकी है। वहीं प्रदेश सरकार में मंत्री व भड़काऊ भाषण देने के आरोपी कपिल देव अग्रवाल ने इन मुकदमो को सपा सरकार द्वारा फर्जी तरीके से लगाना बताया है।
फाइल फोटो।
दरअसल मुज़फ्फरनगर में 7 सितम्बर सन 2013 में साम्प्रदायिक दंगे हुए थे जिसमें 5 दर्जन से ज्यादा लोगो की हत्या हो गयी थी और हजारो लोगो को अपने घरों से बेघर होकर केम्पों में रहना पड़ा था।
आपको बता दे कि दंगे से पहले 7 सितंबर को सिखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव नंगला मंदौड़ में एक महापंचायत का आयोजन किया गया था। जिसमे गन्ना मंत्री सुरेश राणा, राज्यमंत्री कपिल देव, बीजेपी विधायक संगीत सोम, विहिप नेत्री साध्वी प्राची सहित सैकड़ों भाजपा नेताओं ने भाग लिया था। इस पंचायत के दौरान भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाते हुए पुलिस ने धारा 144 के उलंघन सहित कई गम्भीर धाराओ में इन सभी नेताओं पर मुकदमे दर्ज कर दिये थे। इस पंचायत के बाद मुज़फ्फरनगर में 7 सितम्बर को दंगे भड़क गए थे। जिसपर अब सरकार द्वारा केस वापसी की याचिका दी है और अभी इसपर सुनवाई बाकी है।
फाइल फोटो।
दंगा मुकदमे वापसी के मामले में शासकीय अधिवक्ता राजीव शर्मा के अनुसार कुछ महा पूर्व शासन से मुकदमे वापसी को लेकर पत्र आया था जो कोरोना काल के चलते अभी तक पेंडिंग में है। अभी इस संबंध में यह कहना बहुत मुश्किल है कि यह सभी मुकदमे वापसी होंगे। जब तक कोर्ट में न्यायाधीश द्वारा तथ्यों की जांच कर बहस नहीं हो जाती तब तक कुछ भी करना नामुमकिन है। वह इस मामले में विपक्ष की ओर से अधिवक्ता असद जमा की माने तो सितंबर की पंचायत और खालापार में हुई पंचायत को लेकर जो मुकदमे दर्ज हुए थे उसमें योगी सरकार द्वारा अपने जनप्रतिनिधियों के मुकदमे वापसी के आदेश आए हैं लेकिन जो मुकदमे उस समय भाजपा नेताओं पर लगे थे उन्हीं धाराओं में बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर भी दंगा भड़काने और भड़काऊ भाषण देने के मामले में धारा 144, 188 के तहत मुकदमे दर्ज किए गए थे। अगर योगी सरकार अपने जनप्रतिनिधियों के मुकदमे वापसी ले रही है तो उन्हें वह सभी मुकदमे वापस लेने चाहिए जो दंगा पीड़ितों और उनके ऊपर दर्ज हुए थे।

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