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Friday, November 6, 2026

राजधानी दिल्ली के दिल में बसा ‘जनपथ बाजार’ का इतिहास, पढ़िए पूरी खबर 

दिल्ली, 04 दिसंबर (बु.)। कोरोना के चलते देश के त्यौहार, मेला और बाजारों की रौनक फिकी पड़ गई है। जिसकी वजह से अधिकांश बाजार बंद पड़े हुए है। हम बात कर रहे है  राजधानी दिल्ली के दिल में बसा ‘जनपथ बाजार’की। दरअसल जनपथ बाजार’ का इतिहास ब्रिटिश काल से जुड़ा है। स्थानीय दुकानदारों की मानें तो जनपथ को पहले क्वीन-वे के  नाम से ही जाना जाता था। ब्रिटिश काल में यहां से ब्रिटिश की महारानी विक्टोरिया जाया करती थीं। उस समय केवल एक लेन की सड़क हुआ करती थी, जिसपर उनका रथ चलता था। कुछ सालों के बाद इसका नाम जनपथ कर दिया गया था। वहीं, बंटवारे के समय पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को भारत सरकार ने व्यवसाय करने के लिए जनपथ पर दुकानें दी थी, जिसके बाद से वह आज तक सरकार की दी गई दुकानों में ही अपना काम करते हैं। हालांकि कुछ दुकानदारों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भी बाजार में दुकानें मिली थीं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि यह बाजार करीब 70 साल पुराना है, जहां प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी आदि नेता खरीदारी करने आते थे। आज भी वैसा ही है और लोग के पसंदीदा बाजारों में से एक है। बाजार एसोसिएशन के सचिव सचिव गुप्ता ने कहा कि जनपथ बाजार हस्तशिल्प के लिए मशहूर है, जहां देशी-विदेशी लोग आकर हाथ से बनी मूर्तियां, बर्तन, ताजमहल व अन्य सामान खरीदते हैं। जो देखने में बहुत ही आकर्षक और सुंदर दिखते हैं। इस बाजार को विदेशी पर्यटकों का बाजार भी कहा जाता है। हालांकि, बाजार में इन दिनों कोरोना संक्रमण के चलते विदेशी पर्यटकों का आना बंद है, लेकिन देश के अलग-अलग राज्यों व दिल्ली में रहने वाले लोग आकर खरीदारी करते हैं।

 

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