दिल्ली, 04 दिसंबर (बु.)। केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में राजधानी दिल्ली में किसानों के आंदोलन से यहां की सिख सियासत में भी हलचल तेज हो गई है। अपने आप को किसानों का हितैषी साबित करने की कोशिश में सिख नेता एक-दूसरे को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। जिसके चलते गुरु का लंगर भी उनकी सियासत से अछूता नहीं रह गया है। इसे लेकर भी जुबानी जंग हो रही है। कृषि कानूनों के विरोध में शिरोमणि अकाली दल (शिअद बादल) ने भाजपा से नाता तोड़ लिया था। आपको बता देता दें कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीपीसी) पर अकाली दल का कब्जा है और वह हर सूरत में किसानों के साथ खड़ा दिखना चाहती है। इस कोशिश में धरनास्थलों पर कमेटी की ओर से लंगर लगाने के साथ ही स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। खास बात यह है कि कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा फेसबुक, वाट्सएप और ट्विटर के जरिये इसे प्रचारित भी खूब कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि डीएसजीपीसी हमेशा से आंदोलन करने वालों व अन्य जरूरतमंदों को लंगर उपलब्ध कराती रही है, लेकिन कभी इसका प्रचार नहीं किया गया। कुछ वर्ष पहले उनके डीएसजीपीसी अध्यक्ष रहते हुए जंतर-मंतर पर भी किसानों का आंदोलन हुआ था। उस समय भी आंदोलनकारियों को लंगर उपलब्ध कराया गया था, लेकिन इस तरह से शोर नहीं मचाया गया था।




