गोरखपुर, 01 दिसम्बर (बु.)। आज विज्ञान का स्वरूप काफी विकसित हो चुका है। पूरी दुनिया में तेजी से वैज्ञानिक खोजें हो रही हैं। इन आधुनिक वैज्ञानिक खोजों की दौड़ में दुनिया में जंतुओं की कई प्रजाति लुप्त हो गई है। जैसे डायनासोर, गौरिया, हिरण आदि। जिसके लिए सरकार ने कुछ प्रजातियों के बचाव के लिए अभियान चलाया हुआ है और कुछ के लिए संग्रहालय बनाये जा रहे है। संग्रहालय में दुर्लभ प्रजातियों के जीवाश्म भी रखे जाएंगे। जिसके चलते रामगढ़ ताल के सामने तीन एकड़ में बनने वाले प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय की रूपरेखा तैयार होने लगी है। संस्कृति निदेशालय के निर्देश पर स्थानीय संस्कृत विभाग ने इसे लेकर तैयारी शुरू कर दी है। तीन एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई और अब उसके प्रारूप को लेकर मंथन शुरू हो गया है। लखनऊ से आए विभाग के आर्किटेक्ट ने चिह्नित जमीन का मौका-मुआयना कर संग्रहालय के स्वरूप की जानकारी दी है।

आर्किटेक्ट रोहित परमार और पल्लव कपूर ने बताया कि संग्रहालय में सात गैलरियां बनाने की योजना है। इन गैलरियों में मानव जीवन से लेकर जीव-जंतुओं के विकास और रहन-सहन की जानकारी दी जाएगी। एक गैलरी हजारों वर्ष पूर्व विलुप्त हो चुके डायनासोर के नाम होगी, जिसमें रिलीफ पेेंटिंग, माडल और चित्रावली के माध्यम से डायनासोर की सभी प्रजातियों और उनके विलुप्त होने की वजह बताई जाएगी। अंतिम यानी सातवीं गैलरी में दुनिया के अद्भुत जानवरों का प्रदर्शन किया जाएगा। संग्रहालय में दुर्लभ प्रजातियों के जीवाश्म भी रखे जाएंगे, जिन्हें राज्य संग्रहालय लखनऊ से लाया जाएगा।

गोरखपुर के राजकीय बौद्ध संग्रहालय के उप निदेशक डा. मनोज कुमार गौतम का कहना है कि प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय के लिए स्थान चिह्नित कर लिया गया है। स्थान जीडीए द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है। संग्रहालय का स्वरूप कैसा होगा, इसे लेकर मंथन शुरू हो गया है। प्राथमिक रूपरेखा तैयार कर ली गई है। जल्द इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा।



