लखनऊ, 01 दिसम्बर (बु.)। कहते है की इंसान के खाने का अंदाज़ ही अलग होता हैं वह अपने स्वाद के अनुसार ही भोजन करता है। अगर बात जानवरों की करे तो यह कहना अनुचित नहीं होगा की जानवर भी अपनी पसंद का भोजन करते है। जी हाँ हम बात कर रहे है लखनऊ के जू की जहाँ जू में मौजूद हर जानवर का खाना उनकी अपनी पसंद का होता है। यहां भालू के खाने का अंदाज ही अलग है। सुबह 10 बजे तक नाश्ते में वह गुड़, दूध और चावल से बनी खीर का मजा लेता है। दोपहर का भोजन भी लाजवाब होता है। उसे आधा-आधा किलोग्राम आटे की रोटी के साथ गर्म दूध परोसा जाता है। जैसे हम आप सुबह से नाश्ते और भोजन का प्रबंध करते हैं, वैसे ही चिडिय़ाघर के एक हजार वन्यजीवों के लिए भी नाश्ते और फिर भोजन के लिए तैयारी की जाती है। कहीं दूध गर्म होता है तो कहीं अंडे उबाले जाते हैं। गाजर और फल को साफ करने के साथ ही पालक और अन्य साग धुले जाते हैं। हिरनों के लिए चारे की कटाई करने के साथ ही भीगे चने को साफ किया जाता है।

आपको बता दे की चिडिय़ाघर में मांसाहारी वन्यजीवों के लिए हर दिन 130 किलोग्राम गोश्त खरीदा जाता है। अगर शेर व टाइगर की तबीयत खराब होती है तो बकरे या मुर्गे का गोश्त या फिर इनका सूप दिया जाता है। मैना को फल के साथ ही ब्रेड पसंद है तो अनार चिम्पांजी का पसंदीदा फल है। सर्दी में चिम्पांजी और बंदर को उबले अंडे भी दिए जा रहे हैं। उबले अंडे मिलते ही बंदर और चिम्पांजी फल को छोड़ देते हैं। इसी तरह एमू, शुतुरमुर्ग और मकाऊ को भी अंडा दिया जाता है।


आपको शायद ही पता हो, अब शेर, टाइगर, भेडिय़ा और तेंदुए को दिन में भोजन नहीं दिया जाता है। शाम के बाद डिनर में उनके बाड़े में गोश्त पहुंचाया जाता है। हेड कीपर नंदन सिंह बताते हैं कि दोपहर में गोश्त देने से एक घंटा इन वन्यजीवों को बंद करना पड़ता था और दर्शक उन्हें देख नहीं पाते थे। खाने के बाद वन्यजीव सुस्त भी हो जाते थे, लिहाजा अब शाम के बाद ही उन्हें गोश्त दिया जाता है तो यह वन्यजीव दर्शकों के सामने ही रहते हैं।





