16.7 C
Muzaffarnagar
Friday, March 20, 2026

मेरठ: एशिया फतह के बाद अब पैरालिंपिक के स्वर्ण पर टिकी तीरंदाज विवेक की निगाहें

मेरठ,29 नवम्बर (बु.)। लक्ष्य निगाहों में बस जाए जो कमान से निकला तीर उसे भेदता जरूर है। कुछ ऐसा ही कारनामा मेरठ के पैरा तीरंदाज विवेक चिकारा ने पिछले साल बैंकाक में किया था। 19 से 26 अक्टूबर 2019 तक आयोजित एशियन पैरा तीरंदाजी प्रतियोगिता में विवेक चिकारा ने एशिया के नंबर वन खिलाड़ी को 7:1 के प्वाइंट सेट से हराकर स्वर्ण पदक जीता और एशिया का ताज अपने सर रखा। प्रतियोगिता के पूर्व विवेक की एशिया में रैंकिंग दो थी जो चैंपियन बनते ही एशिया नंबर-वन रेंक होल्डर बने गए। प्रतियोगिता में विवेक ने टीम स्पर्धा में भी मलेशिया की टीम को 7:3 प्वाइंट सेट से हराकर कांस्य पदक भी जीता था। अपने प्रदर्शन के बलबूते पर टोक्यो पैरालिंपिक गेम्स का टिकट हासिल कर चुके विवेक चिकारा की निगाहों में पैरोलिंपिक का स्वर्ण पदक आंखों में चमकने लगा है। कोविड-19 के कारण पनपी स्थिति को वह सकारात्मक लेते हुए इस अवसर को स्वर्ण पदक हासिल करने की दिखा में और कड़ी मेहनत का अवसर मान रहे हैं। विवेक की स्कूली शिक्षा बागपत रोेड स्थित मिलेनियम पब्लिक स्कूल से हुई। साल 2015 में उन्होंने पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई पूरी की और उसी साल महिंद्र कंपनी में सेवाएं देने लगे। एक जनवरी 2017 को रोहटा रोड पर हुई सड़क दुर्घटना में विवेक के पैर बुरी तरह जख्मी हो गए जिससे पैर काटने की नौबत आ गई। इसके बाद अपने पैरों पर खड़े हुए और तीरंदाजी शुरू की। उनके पिता देवेंद्र सिंह किसान हैं और माता संजना देवी गृहणी हैं। माता-पिता के आशीर्वाद और प्रशिक्षकों के प्रोत्साहन ने विवेक विजेता बनने के लिए प्रेरित किया।

Related Articles

- Advertisement -spot_img

Latest Articles