मोरना, 6 मई (बु.)। लॉकडाउन का सबसे अधिक प्रभाव दूरदराज जाकर कार्य करने वाले मजदूरों पर पडा है। सरकार की कोई स्पष्ट नीति न होने के कारण हजारों लाखों मजदूर सैकडों मील की पैदल यात्रा कर भटक रहे हैं। दूसरे राज्य से पैदल यात्रा कर लौट रहे मजदूरों के काफिले के लिए प्रशासन ने ऐसी मुश्किल पैदा कर दी है कि 35 मजदूर भूखे रहकर दम तोडने को मजबूर हैं।
भोकरहेडी मोरना क्षेत्र में पिछले एक माह के भीतर पंजाब, हरियाणा, उत्तराखण्ड राज्य में कार्य करने वाले मजदूरों का गुजरना जारी है। पैदल यात्रा करने वाले मजदूर बिजनौर, मुरादाबाद, शाहजहांपुर, लखनऊ व रायबरेली आदि दूरस्थ जिलों के निवासी हैं। आरम्भ में इन मजदूरों के खाने की व्यवस्था समाजसेवियों द्वारा कर दी जाती थी। समय गुजरने के बाद समाजसेवियों के हौंसले भी कम होते गये। वहीं बाहरी लोगों को देखकर लोगों के मन में महामारी की आशंका व्याप्त हो गयी। बुधवार को भी सैकडों मजदूरों का जत्था क्षेत्र से गुजर रहा था, जिनमें 35 व्यक्ति रोते बिलखते नगर पंचायत भोकरहेडी बस स्टैण्ड पर ठहर गये। इन व्यक्तियों को लेकर कस्बे में अफवाह फैल गयी। मजदूरों ने बताया कि वह चंडीगढ में मजदूरी करते हैं। लखनऊ व रायबरेली जिलों के रहने वाले हैं। बिजनौर जिले की सीमा पर पुलिस ने उन्हें वापस लौटा दिया है। अब वह कहां जाएं? मजदूरों द्वारा जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर कार्यालय से सम्पर्क की बताई गयी, जहां उन्हें अपने अपने जनपद के जिला कार्यालयों से सम्पर्क करने के लिए कहा गया। किसी प्रकार की कोई मदद न मिलने से निराश मजदूर बस स्टैण्ड भोकरहेडी पर डेरा डाले हुए हैं। दूसरे प्रदेश से आये व्यक्तियों को लेकर कस्बे में भारी बेचैनी है। नागरिकों ने मजदूरों के लिए व्यवस्था कर उनको घर पहुंचाने की गुहार प्रशासन से लगाई है।


