मुजफ्फरनगर, 13 सितंबर (बु)। पिछले कुछ दिनों से बुलेटिन लगातार जनपद के जिला अस्पताल में बढ़ रहे वायरल और डायरिया के मामलों के प्रति लोगों को जागरूक कर रहा है। अब जानकारी मिल रही है कि मामले कम होने के बजाये आज से दौगुनी स्पीड में बढ़ने लगे हैं। जो कि काफी चिंता का विषय है।
आज बुलेटिन टीम ने जिला अस्पताल में डाक्टरों से जानकारी ली तो पाया कि उल्टी दसत से पीडित मरीजों की संख्या प्रतिदिन 500 ज्यादा है। यहीं नहीं प्रतिदिन 40 से 50 मरीजों को अस्पताल के वार्ड में भर्ती करवाना पड़ रहा है। जानकारी यह भी है कि इसके कारण लोगों को काफी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ रहा है।
गंभीर मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। जिला अस्पताल में वायरल बुखार सहित डायरिया और गले में संक्रमण के रोगियों की भरमार है। बुखार की शुरुआत हलका नजला और खांसी से होती है। धीरे-धीरे बाले में खराश के बाद अचानक तेज बुखार चढ़ता है, जिसमें पूरा शरीर दर्द करने लगता है। चिकित्सक ऐसे लक्षण आने पर वायरल बुखार, मानकर उपचार दे रहे हैं।
आपको बता दें कि वायरल में खांसी, जुखाम बुखार होने पर साफ हो जाता है कि आपको वायरल हो चुका है लेकिन साथ ही अगर इन दोनों के साथ अगर दसत लगने की दिक्कत हो जाए तो समझ लिजिये कि आपको डायरिया हो चुका है। ऐसे में अस्पताल जायें और इलाज करवाएं।
डायरिया में शरीर में पानी-नमक की कमी को पूरा करने के लिए खूब सारा तरल पदार्थ पीएं, जैसे नारियल का पानी। आसानी से पचने वाले हल्के खाद्य पदार्थ जैसे केला, चावल, सेब का सॉस और टोस्ट खाएं। तले हुए और मसालेदार भोजन से बचें। प्रोबायोटिक्स का सेवन आंतों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है।
फिलहाल यह हम सभी के लिये चिंता का विषय है क्योंकि छोटे बच्चों में भी यह लक्षण पाये जा रहे हैं। छोटे बच्चों में यह लक्षण पाया जाना काफी हानिकारक है। छोटे बच्चों की सहनशक्ती इतनी नहीं होती है कि इसे झेल पायें इसलिये अगर बच्चों में लक्षण पाये जाते हैं तो फोरन बच्चे को चाइल्ड स्पेशलिस्ट के पास ले जाएं।
डायरिया से बचाव के लिए मुख्य रूप से स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है, जिसमें हाथ धोना, सुरक्षित पानी पीना और भोजन को अच्छी तरह पकाकर खाना शामिल है। रोटावायरस का टीका लगवाना, खुले में खाना खाने से बचना, और साफ़-सफ़ाई बनाए रखना भी डायरिया से बचने के प्रभावी तरीके हैं।
साथ ही आपको बता दें कि छोटे बच्चों में डायरिया होने पर, सुनिश्चित करें कि बच्चा पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ जैसे कि ओआरएस, माँ का दूध या उबला हुआ पानी ले रहा है, ताकि डिहाइड्रेशन यानी पानी की कमी से बचा जा सके। बच्चा जब तक ठीक न हो जाए, उसे साफ और पौष्टिक भोजन दें। घर में साफ-सफाई का ध्यान रखें, खासकर हाथों को धोएं, और बच्चे को रोटावायरस का टीका ज़रूर लगवाएं। यदि दस्त 2-3 दिनों से ज़्यादा रहें, तेज बुखार हो या मल में खून आए, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
हमारे पास डायरिया और वायरल के मामलों बढ़ोतरी हुई है जो कि चिंता का विषय है। फिर हम इस पर नजर बनाये हुए हैं। इससे बचने का सबसे अच्छा और बढ़िया उपाये है कि जितना हो सके लोगों को जागरूक किया जाए। हमारे पास जो भी सिरियस मामले आ रहे हैं उनको हम भर्ती करके उनको गुलुकोस चढा रहे हैं। जिला अस्पताल बढ़ते हुए मामलों को देखते हुए अलर्ट पर है।

बरिष्ठ चिक्तसक, जिला अस्पताल मुजफ्फरनगर।


