मुजफ्फरनगर, 10 सितंबर (एजेंसी)। जनपद के जिला अस्पताल में पहले ही वायरल और डायरिया के मामलों की भरमार लगी हुई है। ऐसे में बुलेटिन ने जिला अस्पताल में जानकारी एकत्रित की तो बडे तथ्य सामने आया है। जिला अस्पताल के इमरजैंसी में प्रतिदिन 60 से 70 मामले दमे के मरीजों के आ रहे हैं। ऐसे में एक और बड़ी बात सामने आई है कि इसमें 70 साल से ज्यादा के उम्र के वृद्धों के मामले तो है हीं लेकिन 40 से 50 साल के लोगों को भी दमे की दिक्कत सामने आने से कहीं ना कहीं चिंता का विषय बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार दमे की दिक्कत साफ हवा में सांस ना लेने के कारण होती है। जैसे कि फैक्ट्रीयों से निकलने वाला गंदा धुंआ जो हवा में फैल रहा है वो कहीं ना कहीं हवा का काफी हद तक खराब कर रहा है। इससे निकलने वाले धुंए में कई ऐसी जहरीली गैसें होती हैं जो बुड़े लोगों ही नहीं बच्चों और युवाओं के स्वास्थ्य पर भी गंदा प्रभाव डालती हैं।

वहीं दुसरी तरफ अगर आप वाहनों की भी बात करें तो हर घर में दो से तीन वाहन लोग रख रहे हैं। ऐसे में आप खुद समझ लिजिये कि वाहनों से निकलने वाले धुंए की मात्रा कितनी होगी और यह धुआं लोगों के शरीर को किस तरह हानि पहुंचा रहे हैं यह हमें प्रत्यक्ष रूप से दिख रहा है।
जानकारी के अनुसार आपको बता दें कि अस्थमा एक दीर्घकालिक फेफड़ों की बीमारी है जिसके कारण खांसी, घरघराहट, सीने में जकड़न और सांस लेने में तकलीफ़ होती है। अस्थमा के लक्षण हल्के, मध्यम या गंभीर हो सकते हैं, और कभी-कभी जानलेवा भी हो सकते हैं। जब लक्षण अचानक बिगड़ जाते हैं, तो इसे अस्थमा का दौरा कहा जाता है। सभी दीर्घकालिक श्वसन रोगों की तरह, अस्थमा का भी कोई इलाज नहीं है। लेकिन ज़्यादातर मामलों में, अस्थमा का प्रबंधन बहुत आसान है।
दमा के मुख्य लक्षणों में घरघराहट, सांस फूलना, सीने में जकड़न, और लगातार खांसी शामिल हैं, जो अक्सर रात या सुबह में बढ़ जाती है। ये लक्षण हल्के से गंभीर हो सकते हैं और अचानक दौरे के रूप में भी आ सकते हैं, जिसके लिए तत्काल चिकित्सीय सहायता की आवश्यकता हो सकती है।
अस्थमा कोई एक ही बीमारी नहीं है जो सभी पर असर करती है। आपके या आपके परिवार के किसी सदस्य के लक्षणों का कारण किसी और के लक्षणों से काफ़ी अलग हो सकता है। जब आप समझ जाते हैं कि आपके फेफड़ों के अंदर क्या हो रहा है और आपकी साँसें पराग, फफूंद, धूल के कण या सिगरेट के धुएँ जैसे एलर्जी और जलन पैदा करने वाले तत्वों पर कैसे प्रतिक्रिया करती हैं, तो आप लक्षणों को रोकने या कम करने के लिए कदम उठा सकते हैं।
दमा से पूरी तरह बचाव संभव नहीं है, लेकिन इसके दौरे कम करने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ट्रिगर्स से बचें, जैसे धूल, धुआं, और एलर्जी। डॉक्टर की सलाह से सही दवाएं नियमित रूप से लें, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से स्वस्थ वजन बनाए रखें, फ्लू और निमोनिया के टीके लगवाएं, और तनाव को कम करें।
साथ ही आपको बता दें कि दमा या अस्थमा के मामलों में जब ऑक्सीजन की मात्रा शरीर के अंदर 90 से नीचे चली जाती है तो मरीज को सांस लेने में दिक्कत आती है। ऐसे में मरीज को डॉक्टर के पास ले जायें और ऑक्सीजन लगवायें।
जिस मरीज को दमा की दिक्कत हो उसे धुएं से दूर रखिये और अगर कोई घर में धुम्रपान करता है तो दमे के मरीज को दूर रखिये। साथ ही जिसे भी दमे की दिक्कत है उसे ठंडी चींजें जैसे ठंडा पानी, दहीं, खटे खानपान से दूर रखिये। इसके अलावा दमे के मरीज को गर्म चीजों भोजन यानि नॉर्मल पानी और हरी सब्जियों का सेवन ही करवाएं। यह सही है कि जिला अस्पताल में प्रतिदिन 60 से 70 मामले आ रहे हैं। हालांकि जिला अस्पताल में इसकी दवाई उपलब्ध है। हमारे पास पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन के सिलेंडर उपलब्ध हैं।
डॉ. योगेंद्र त्रिखा
बरिष्ठ चिक्तसक, जिला अस्पताल मुजफ्फरनगर


