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Friday, March 6, 2026

नीचता की हदें पार : दवा व्यापारी कर रहा था 3.50 करोड़ की नकली दवाईयों का कारोबार

मुजफ्फरनगर, 10 सितम्बर (बु.)। कुछ लोगों को दूसरों की जिंदगी से खिलवाड़ करने में भी कोई शर्म नहीं आती। अपने घर का पेट भरने के लिए वे लाखों जिंदगियों से खिलवाड़ करने को तैयार रहते हैं। जिन दवाईयों को जीवन रक्षा के लिए बाजारों में बेचा जाता है, वही दवाईयां यदि कोई नकली बेचने लगे तो उससे अधिक नीचता शायद ही कोई और हो..। ऐसा ही एक मामला आयुष मैडिकोज एजेंसी के नाम से काम करने वाले तरुण गिरधर पुत्र स्व. सुरेन्द्र गिरधर का सामने आया है, जिसका जिला परिषद में ऊपरी मंजिल से यह सारा काला कारोबार चल रहा है। इतना ही नहीं शातिर तरुण ने अपनी पत्नी नितिका के नाम से 2018 में आयुष मैडिकोज के नाम से एक एजेंसी खोल रखी है। शातिर तरुण गिरधर गांधी कॉलोनी, गली नं. 9 से भी उक्त कारोबार को अंजाम देता था।

आज बुधवार को सहारनपुर मण्डल के सहायक आयुक्त नरेश मोहन दीपक, सहारनपुर मण्डल की सहायक आयुक्त दीपा लाल की टीम ने घर पहुंचकर छापामारी की जो जानकारी हासिल हुई कि शातिर ने घर पर ही लैपटॉप, मोबाइल व एजेंसी के अहम दस्तावेज घर पर ही रखे हुए थे और उक्त शातिर किसी राहुल कुमार पुत्र अशोक कुमार निवासी गांधी कॉलोनी के साथ मिलकर नकली दवाईयों का कारोबार कर रहा था। पकड़ी गयी दवाईयों में वेटरिन-8 और 16 एमजी, रोजोवास 10 एमजी और एलेग्रा 120 एमजी की नकली दवाइयां खरीद रहे थे।

यह दवाइयां उसे एमआरपी से 36 प्रतिशत कम की दर पर मिलती थीं, जिन्हें बाजार में विक्रय करने के बाद वह मोटा आर्थिक लाभ कमा रहा था। तरुण ने पूछताछ में बताया कि सभी दवाइयों को उसने आगरा की बंसत बंसल मेडिकल एजेंसी, ताज मेडिको तथा एमएसवी मेडी प्वाइंट से दवा खरीद रहा था। चार माह में वह 3.50 करोड़ रुपये की दवा खरीदकर बाजार में सप्लाई कर चुका है। मात्र चार माह में वह 3.50 करोड़ रुपये की दवा खरीदकर बाजार में सप्लाई कर चुका है। आरोपित को नई मंडी पुलिस के हवाले किया गया है, जबकि तरुण गिरधर का पार्टनर राहुल निवासी गांधी कॉलोनी, गली नं. 13 अभी फरार है।

औषधि निरीक्षक पवन कुमार शाक्य की तहरीर पर नई मंडी पुलिस ने तरूण गिरधर के नकली दवा के सिंडिकेट माफिया एसएसवी मेडी प्वाइंट के मालिक सोहित बसंल पुत्र मुकेश बंसल, बंसल मेडिकोज एजेंसी के मालिक संजय बंसल पुत्र एसपी बंसल, ताज मेडिको के मालिक मुकेश बंसल पुत्र जगदीश प्रसाद बंसल निवासी नामनेर आगरा नगरा, थाना कमिश्नरेट के विरुद्ध नई मंडी थाने में अभियोग दर्ज कराया है। पकड़े गए व्यापारी से सीओ नई मंडी राजू साव ने भी पूछताछ की है।

साजिश के तहत तरुण ने राहुल को दिये थे फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र

मुजफ्फरनगर। तरूण गिरधर की आंच गांधी कॉलोनी के साथ-साथ जिला परिषद् बाजार में भी जा पहुंची हैं। डीआई पवन शाक्य ने बताया कि उत्तरी गांधी कालोनी की गली नम्बर-13 में ही रहने वाले राहुल कुमार पुत्र अशोक कुमार के साथ दवा कारोबार में तरूण गिरधर पार्टनर है। तरुण इतना शातिर है कि राहुल के साथ मिलकर जिला परिषद मार्किट के प्रथम तल पर दुकान नं. 21 में आशुतोष फार्मा के नाम से दवा का कारोबार करा रहा था। तरुण ने राहुल को कूटरचित साजिश के तहत फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र दिया था, जिसके आधार पर लाइसेंस प्राप्त किया गया। बताया कि जांच में खुलासा होने पर विभागीय स्तर पर आयुष मेडिकोज और आशुतोष फार्मा का लाइसेंस निरस्त करने की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। इस प्रकरण में तरूण गिरधर को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि तरूण के साथ राहुल फरार है।

आखिर पहले से क्यों नहीं खुलते इतनी बड़ी मात्रा में नकली दवाईयां बिकने के राज?

मुजफ्फरनगर। लगातार देखा जा रहा है कि जब करोड़ों की नकली दवाईयां आम आदमी के पेट में उतर जाती हैं, उसके बाद ही ये पर्दाफाश होते हैं कि इतने करोड़ की दवाईयां नकली बिक चुकी हैं। आए दिन जिला परिषद बाजार में छापामारी करने वाला औषधि विभाग आखिर यह क्यों नहीं जान पाता कि कहां-कहां नकली और अवैध धंधे चल रहे हैं, जबकि व्यापार मण्डल के कई पदाधिकारी औषधि विभाग की मदद करने तक को तैयार रहते हैं, इसके पीछे का क्या खेल है वह तो धीरे धीरे समझ आ जाएगा मगर आम जनता यही सवाल उठाती है कि आखिर मामूली सा एक दुकानदार नकली दवाईयां मात्र चार महीने में बेच देता है और आषधि विभाग को हवा तक नहीं आती। यदि औषधि विभाग को पहले से आ भी गयी थी तो फिर खामोश क्यों थी? इन सारे सवालों के जवाब भी कुछ दिनों बाद शायद सार्वजनिक होने की सम्भावनाएं जताई जा रही हैं। विश्वसनीय सूत्रों की माने तो उक्त मामला लखनऊ में मुख्यमंत्री दरबार में पहुंचा था, जिसके बाद ड्रग कंट्रोलर लखनऊ की टीम ने साथ मिलकर उक्त कार्रवाई को अंजाम दिया। ऐसा भी माना जा रहा है कि इस मामले में एक ड्रग अधिकारी को भी दाएं-बाएं किया जा सकता है।

पत्नी नितिका ने दिया शपथ पत्र कि उसका सिर्फ नाम था, काम पति ही करते थे

मुजफ्फरनगर। बताया जाता है कि अधिकारियों ने पहले नितिका को गिरफ्तार करने की तैयारी की थी मगर नितिका से जब अधिकारियों ने बातचीत की तो नितिका ने साफतौर पर कहा कि सिर्फ फर्म का नाम उसके नाम पर है, बाकी कारोबार में शामिल उसके पति ही हैं। नितिका की बात पर सहमति व्यक्त करते हुए अधिकारियों ने मौखिक बात न सुनकर नितिका से बाकायदा इस बात का शपथ पत्र लिया, उसके हस्ताक्षर व अंगूठा लगवाया और वीडियो बनवाई। उसके बाद जाकर अधिकारियों ने तरुण गिरधर के खिलाफ कार्रवाई

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