दिल्ली, 21 मार्च (बु.)। निर्भया के चारों दोषियों पवन कुमार गुप्ता, मुकेश कुमार सिंह, अक्षय सिंह ठाकुर और विनय कुमार शर्मा की फांसी को एक साल पूरा हो गया है। 20 मार्च, 2020 को सुबह 5 बजकर 30 मिनट पर तिहाड़ जेल संख्या 3 में चारों को फांसी पर लटका दिया गया था। निर्भया के दोषियों को फांसी दिए हुए एक साल पूरा होने पर जाने-माने वकील एपी सिंह ने शनिवार को कई सवाल उठाए हैं। एपी सिंह ने देश में फांसी की प्रासंगिकता पर ही सवाल उठाते हुए कहा कि 4 युवकों को केवल इसलिए फांसी दे दी गई क्योंकि समाज को एक संदेश देना था। अरे इस संदेश से क्या हुआ? क्या दुष्कर्म के मामले रुके? क्या हत्या के अपराध रुके? नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau) के रिकॉर्ड इस बात की तस्दीक भी करते हैं कि निर्भया के दोषियों की फांसी के बाद कोई सकारात्मक बदलाव नहीं आया। सुप्रीम कोर्ट के वकील एपी सिंह ने कहा कि दुष्कर्म के मामलों को रोकने के लिए फांसी कोई एकमात्र समाधान नहीं है। दरअसल, फांसी किसी भी अपराध को रोकने का विकल्प नहीं है। निर्भया के दोषियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन सभी युवकों का यह पहला अपराध था और सभी बेहद गरीब परिवार से थे। इनका कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं था। युवाओं में सुधार की गुंजाइश थी। जेल में भी इन सभी का व्यवहार बताता है कि ये कोई दुर्दांत अपराधी नहीं थे। इन चारों को देने से बच्चे अनाथ हुए और कई बीवियां विधवा हो गईं। मां से बेटे छिना, पिता से बेटा तो किसी ने पिता को खो दिया। साल 20 मार्च को जब चारों युवकों को फांसी पर लटकाया गया देश में उस दिन भी दुष्कर्म की घटनाएं हुई। इसका मतलब यहह है कि फांसी से दुष्कर्म के मामलों को नहीं रोका जा सकता।


