गोरखपुर, 12 मार्च (बु.)। कोरोनाकाल में लंबे समय तक स्कूल से दूर रहे बच्चे अब पढ़ाई से जी चुरा रहे हैं। कहने के लिए स्कूल तो पढऩे जा रहे हैं, लेकिन उनका पढ़ाई में जरा भी मन नहीं लग रहा है। मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों ने जब सीबीएसई, आइसीएसई और यूपी बोर्ड के विद्यालयों में जाकर कक्षा छह से 12 तक के बच्चों से अलग-अलग मिलकर छात्रों की काउंसिलिंग की तो उन्हें उनकी प्रकृति में बदलाव देखने को मिला। बच्चे पढ़ाई से जी चुराते नजर आए। काउंसिलिंग के दौरान अधिकांश बच्चों में मोबाइल की लत देखने को मिली। विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे बड़े-बड़े ओहदे पाने का सपना तो देख रहे हैं, लेकिन उसे पूरा करने के लिए इंटरनेट मीडिया का सहारा ले रहे हैं। कोरोना के बाद बच्चों की पढ़ाई डिजीटल संक्रमण की चपेट में आ गई है।मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र की टीम पिछले एक माह में शहर के लगभग 30 स्कूलों में जाकर बच्चों की काउंसिलिंग कर चुकी है। जिसमें बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी कई चौकाने वाली बातें सामने आई हैं। टीम को जहां बच्चों में आत्मविश्वास की कमी मिली है वहीं कई छात्रों के अंदर सीखने की प्रवृत्ति का भी अभाव देखने को मिला। किताब से पढऩे की बजाय छात्र गूगल से प्रश्नों का उत्तर लिखने में रुचि दिखा रहे हैं। याद की हुई बातें भी जल्द भूल जा रहे हैं। कक्षाओं में एकाग्रचित्त होकर पढऩे की बजाय उनका ध्यान इधर-उधर रह रहा है।काउंसिलिंग करने स्कूल पहुंची मनोवैज्ञानिकों की टीम से बच्चों ने सवाल कर अपनी जिज्ञासाओं का शांत किया। किसी ने सवाल याद करने के लिए तरीके पूछे तो किसी ने सुबह उठने का मन नहीं करता इसके लिए क्या करना चाहिए पूछा। कुछ ने पढ़ाई में रुचि पैदा करने के बारे में सवाल किया तो किसी ने करियर सवारने के उपाय पूछ डाले।विशेषज्ञों ने काउंसिलिंग के दौरान बच्चों को कई तरह के टिप्स दिए। इनमें खासतौर से एकाग्रचित्त होकर पढ़ाई करने के लिए जहां नियमित अनुलोम-विलोम करने पर जोर दिया वहीं पढ़ी गइ बातें याद करने के लिए बोलकर पढऩे का सुझाव दिया। साथ ही एक-एक घंटे पर पढ़ी गई पाठों की पुनरावृत्ति करने को भी कहा।


