लखनऊ, 15 अप्रैल (बु.)। बुधवार दोपहर डेढ़ बज रहा होगा और गुल्लाला घाट पर लकड़ी खत्म हो गई थी। चौक के पीर बुखारा निवासी आलोक अग्रवाल अपनी दादी का शव लेकर पहुंचे थे लेकिन उनसे कहा गया कि लकड़ी खत्म हो गई है दुबग्गा से लेकर आओ। नॉन कोविड शव लेकर आए लोगों को महापात्र विनोद पांडेय लकड़ी लाने को कह रहे थे और फिर हर कोई भागकर दुबग्गा जा रहा है, जहां से लकड़ी लादकर ला रहा था। शाम तक यह सब गुल्लाघाट पर चलता रहा है। सत्रह शव की अंत्येष्टि के साथ ही लकड़ी खत्म हो गई थी और बुधवार को करीब 61 नॉन कोविड शव यहां आए थे। ऐसे में 44 शवों के लिए लकड़ी कई किलोमीटर दूर से ढोकर लोगों को लानी पड़ी। महापात्र विनोद पांडेय का कहना है कि लकड़ी मिल नहीं रही है और नॉन कोविड शवों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। बुधवार को दोपहर बाद ही लकड़ी खत्म होने शव लेकर आए लोगों को दुबग्गा से लकड़ी लाने को कहा जा रहा था। सरकार की तरफ से कोई इंतजाम लकड़ी के लिए नहीं किए गए हैं। वन विभाग और पुलिस के डर से ठेकेदार लकड़ी नहीं ला रहे हैं। अब कल नॉन कोविड शवों की कैसे अंत्येष्टि होगी? यह सवाल वह खुद ही पूछ रहा है। भैसाकुंड श्मशानघाट पर तो नगर निगम ने लकड़ी उपलब्ध करा दी है लेकिन उसकी मात्रा कम है। महापात्र राजेंद्र मिश्र का कहना है कि कल तक ही काम चल पाएगा। जिस तरह से शव आ रहे हैं, उसे देखते हुए लकड़ी का भंडार करना चाहिए।


