बरेली, 22 अप्रैल (बु.)। कोविड संक्रमण से श्मशान घाटों के दृश्य बेहद दर्दनाक हो चले हैं। व्यवस्थापकों के लिए ये जिंदगी का सबसे भयावाह समय हैं। हर पांच मिनट पर एक अर्थियों के साथ शोकाकुल लोग आते दिखते है। आखिरी वक्त में भी स्वजनों को इंतजार करना पड़ता है, ताकि वह दाह संस्कार कर सके। व्यवस्थापक कहते है कि आम दिनों में अगर दस शव भी आते थे, तो अधिक महसूस होने लगते थे। अब शवों की कतार, श्मशान घाटों की सीमित जगह और रोते-बिलखते स्वजनों को देखकर दिल फटने को आता है। संजयनगर स्थित श्मशान घाट के व्यवस्थापक जेपी सिंह के मुताबिक यहां काम करते हुए करीब बीस साल हो गए। लेकिन, जिस तरह से पिछले ड़ेढ़ सप्ताह से अंतिम संस्कार के लिए आने वाले शवों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उसे देख डर लगने लगा है। हर रोज सुबह नौ बजे से ही श्मशान घाट में रोने-धोने की आवाज कानों में पड़नी शुरू हो जाती हैं, जो शाम छह बजे तक नहीं थमती थीं। बताया कि हर सप्ताह एक दिन के लिए घर चले जाते हैं। मगर, इस समय हालात ऐसे हैं कि कदम खुद ब खुद जैसे बेड़ियों में बंध से गए हैं।


