हरियाणा, 22 मार्च (बु.)। रंगों के त्योहार होली में एक सप्ताह भी नहीं बचा है। लेकिन बाजारों में रौनक बिल्कुल भी नहीं है। पहले होली से सप्ताहभर पहले ही रंग व पिचकारी की दुकानें सड़क किनारे लग जाती थी। परंतु इस बार ऐसा नहीं है। कोरोना वायरस का असर होली पर भी देखा जा रहा है। अभी तक तो लोग दुकानों से पिचकारी व रंग खरीदने से गुरेज कर रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि यदि होली के दिन भी यही हाल रहा तो काफी नुकसान झेलना पड़ेगा।विश्वभर में कोरोना वायरस फैलने के बाद रंगों व पिचकारी पर भी असर पड़ा है। चीन से जो रंग व पिचकारी आयात होती थी उसमें अब बहुत कमी आ गई है। यही वजह है कि इस बार ीभी बाजार में चीन में बनी पिचकारी व रंग नाममात्र दिखाई दे रहे हैं। ज्यादातर दुकानदारों के पास पिचकारी व रंग का पिछला ही स्टॉक पड़ा है। चीन से कम सामान आने के कारण मेड इन इंडिया पिचकारी व रंगों की भरमार देखने को मिल रही है। इस बार बच्चों के लिए डोरिमाेन, बैनटेन, बटर फ्लाई बच्चों को खूब भा रहे हैं। ये पिचकारियां 15 रुपये से लेकर 500 रुपये तक में उपलब्ध हैं। गुलाल, सैंटेड गुलाल भी ग्राहकों को अपनी ओर खींचने में कामयाब हो रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार इस बार ग्राहक पक्के रंग से दूरी बना रहे हैं। दुकानदार सन्नी का कहना है कि कई दिन से सोशल मीडिया पर भी मैसेज आ रहे हैं कि होली पर एक दूसरे को रंग न लगाएं। चीन से आने वाले रंग व पिचकारी से कोरोना वायरस हो सकता है। इसके अलावा रंगों को लेकर कई तरह के मैसेज आ रहे हैं। ये मैसेज महज एक अफवाह हैं या सच्चाई इसका तो उन्हें नहीं पता परंतु इसका असर सीधे उनके काम पर जरूर पड़ेगा। जिससे उन्हें काफी नुकसान होगा।


