हरियाणा, 20 मार्च (बु.)। कभी आंगन में फुदकने वाली गौरैया की आबादी आज संरक्षण करने के स्तर तक पहुंच गई है। मगर कुछ पक्षी प्रेमी हैं जो गौरैया के संरक्षण में जीजान से जुटे हुए हैं। आजाद नगर के संदीप भी उन्हीं में से एक हैं। वह बताते हैं कि वर्ष 2012 में घर की छत छप्पर के रूप में थी। वहां एक गौरैया का परिवार रहता है। मगर जब उन्होंने छत बनाई तो गौरैया के परिवार को जाना पड़ा। ऐसे में यहां से उनके मन में विचार आया कि गौरैया के पास भी अपना घर होना चाहिए। उन्होंने शुरुआत अपने घर से की तो एक घोसला लगाया। इसे देखकर कुछ और गौरैया आ गईं तो उनके लिए भी घर बना दिया। देखत ही देखते यह परिवार 150 गौरैया तक पहुंच गया है। सभी के लिए संदीप ने अलग-अलग घर बनाए हैं और सभी गौरैया के नाम भी रखे हैं। वह किसी को लक्ष्मी, सरस्वती तो किसी का नाम गायत्री है। हैरानी की बात है कि सभी गौरैया की बनावट और बॉडी लैंग्वेज से वह पहचान जाते हैं कि कौन सी चिड़िया है। संदीप ने अपनी पढ़ाई उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से गणित विषय में की है। संदीप बताते हैं कि वह अपने घर में 45 गौरैया के घर लगा चुके हैं। इसमें कुछ लकड़ी के हैं तो कुछ घास से बने हुए। मगर गौरैया की खास बात है कि यह दूसरी गौरैया के घर को देखने के लिए जरूर जाती हैं कि इन्होंने कैसे घर का निर्माण किया है। इस कारण इनके बीच कई बार लड़ाई भी हो जाती है क्योंकि गौरैया यह चाहती भी नहीं है कि कोई उनके घर आए। वह इन्हें दिन के दो बार खाना देते हैं। शुरुआत में परिजनों को आपत्ति हुई मगर अब वह भी गौरैया को अपने परिवार का हिस्सा मान चुके हैं।


