मुजफ्फरनगर, 22 मार्च (बु.)। मानवीय त्रासदी की घटनाएं इतिहास बन जाती है सैकड़ों हजारों वर्षों पूर्व घटित त्रासदी की घटनाओं का उल्लेख इतिहास में दर्ज है। इतिहास फिर इतिहास होता है। सच्चाई से रूबरू होना दूसरी बात है। किसने कल्पना की होगी कि पूरी दुनिया कोरोना की कयामत से सहम जाएगी। 22 मार्च 2020 का वह दिन जब सरकार द्वारा जनता कर्फ्यू लगाया गया था उसके बाद शुरू हुआ था लॉकडाउन। कोरोना कि भारी दहशत, सुनसान सड़के सदा गुलजार रहने वाले वीरान पड़े बाजार, चारों और पसरा सन्नाटा, पुलिस के बजते हुटल, अर्थी को कंधा न देने, मय्यत को मिट्टी ना दे सकने का अफसोस, वक्त हर वक्त बढ़ती कोरोना की रफ्तार ऊपर से बढ़ती आर्थिक परेशानी ने मानसिक तनाव उत्पन्न कर दिया था। ठीक इन्हीं दिनों इसी माह कोरोना का भयावह साया देश के आम जनता पर मंडराया था।

एक बार फिर यही महीना देश के आम जनता को फिर से भय के माहौल में ले जा रहा है। और ठीक इसी तरह से एक बार फिर देश में कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं। जैसा कि वर्ष 2020 के मार्च में सामने आए थे। देश के कई राज्य एक बार फिर से कोरोना की चपेट में आते दिखाई दे रहे हैं। उनमें चाहे मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र या फिर हो पंजाब या दिल्ली इन राज्य में आज फिर से पुराना जैसा ही भय दिखाई दे रहा है। यदि आज भी हम कोरोना के नियम का पालन करें तो शायद कोरोना की पहली लहर की तरह दूसरे लहर को भी मात दे देंगे। अब सोचना हमें है इस भयावह दौर से हम किस तरह से उभरते हैं।



