बुलंदशहर, 22 मार्च (बु.)। यूपी के बुलंदशहर केा धनौरा जाट बाहुल्य गांव है। गांव में देश सेवा का जज्बा भी है, लेकिन दुख:द बात यह है कि इस गांव के कालीचरण, इंद्र, नरेंद्र फौजी और अमित धनौरा सहित कुछ परिवारों में पिछले तीन दशक से चल रही रंजिश में अब तक करीब 30 की हत्याएं हो चुकी हैं और पांच से ज्यादा लोग उम्र कैद की सजा भुगत रहे हैं, लेकिन इन परिवारों में इंतकाम की आग ठंडी नहीं हो रही है। जिला मुख्यालय से करीब 20 किलो मीटर दूर थाना ककोड़ क्षेत्र में बसे धनौरा गांव के इन परिवारों की कहानी फिल्मी ज्यादा है। 30 साल पहले यानि 11 मार्च 1990 दिन शनिवार को काली चरण व महेंद्र के स्वजन में होली के हुड़दंग को लेकर हुआ विवाद खून की होली में बदल गया था। दोनों अलग-अलग मोहल्ले के थे और मोहल्लेबाजी की इस लड़ाई में उसी रोज कालीचरण पक्ष के वीरपाल, वेदपाल व तत्कालीन ग्राम प्रधान तेजपाल की हत्या हुई थी, जबकि महेंद्र पक्ष से महेंद्र व दो अन्यों का कत्ल हुआ था। इनकी चिताओं से सुलगी इंतकाम की आग में 1998 में महेंद्र के छोटे भाई इंद्र व रामवीर को गोलियों से भून दिया था। वक्त के साथ धीरे-धीरे इस रंजिश में कालीचरण परिवार के खिलाफ नरेंद्र फौजी व शूटर अमित धनौरा के पिता राजेंद्र फौजी भी कूद गए। इसके बाद तो जिसे भी मौका मिलता है, वही सामने वाले को लुढका देता है।प्रतिशोध की इस आग में कानून का खौफ किसी को नहीं है। 1995 में कालीचरण के बेटे जगवीर जो कि पंजाब में रह रहा था, उसको विपक्षियों ने वहीं जाकर 12 गोली मारी थी।



