कानपुर, 20 मार्च (बु.)। कहते हैं कि बेटे भले ही अपने मां-बाप को ठुकरा दें, पर बेटियां हमेशा उनके सुख-दुख में साथ खड़ी होती हैं। ऐसे में यदि बेटियां ही अपने पिता से मुंह मोड़ लें तो इसके पीछे वजह मुफलिसी की मार हो सकती है या फिर प्यार ही रूठ जाए तो बेटी ऐसा कदम उठा सकती है। ऐसा ही एक मामला कानपुर में सामने आया है। जिस पिता ने जीवनभर अपनी लाडली बेटियों की हर खुशी पूरी की, वही उनके लिए बुढ़ापे में बोझ बन गए। मां के साथ मिलकर दो पुत्रियां ही अपने बीमार व लाचार पिता को हैलट के बाहर छोड़कर चलीं गईं। मुसीबत में जब अपनों ने साथ छोड़ दिया तो उस बुजुर्ग का सहारा एक संगठन बना, जिसने उनकी मदद के साथ ही सेवा शुरू की है। स्वजन द्वारा ठुकरा दिए गए इन बुजुर्ग का नाम घनश्याम है, जो गोविंद नगर ए ब्लॉक के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि उनके पैर में गहरा जख्म ठीक नहीं हो रहा था, जिसकी वजह से स्वजन ने उनसे दूरी बना ली है। करीब दस दिन पहले स्वजन उन्हें ई रिक्शे में डालकर हैलट गेट के बाहर फेंक गए। इसके बाद वह दोबारा कभी उन्हें देखने नहीं आए। किसी तरह से वह अस्पताल के अंदर पहुंचे और डॉक्टरों से मदद मांगी। पांच दिन पहले घनश्याम की कहानी लक्ष्य संस्था तक पहुंची।


