अलीगढ़, 05 मार्च (बु.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना पाकिस्तानी जिहादियों से करने पर राहुल गांधी खुद घिर गए हैं। आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने उनपर पलटवार किया है। आरएसएस ने कहा कि जिस संगठन की राहुल गांधी जिहादियों से तुलना कर रहे हैं, उसी संगठन को उनके नाना व पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलान नेहरू ने 26 जनवरी को परेड में उतारा था। उन्होंने आरएसएस की तारीफ भी की थी। जिस संगठन के स्वयंसेवकों की उनके नाना ने जमकर तारीफ की और महत्व देते हुए परेड में शामिल किया, राहुल गांधी उसी पर सवाल उठा रहे हैं। इसका मतलब, उन्हें अपने नाना द्वारा पूर्व में किए गए कार्य पर ही विश्वास नहीं रह गया है। उन्हें आरएसएस के इतिहास को अच्छी तरह पढ़ना चाहिए। यदि ऐसे ही बयान देंगे तो कांग्रेस को पूरी तरह से डूबो देंगे। आरएसएस के पदाधिकारी और सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी सुरेश चंद्र अग्रवाल ने कहा कि राहुल गांधी के व्यक्तत्व में कभी गंभीरता नहीं दिखती है। वह मंच पर कुछ भी बोल जाते हैं, बाद में वो जनता के हंसी का पात्र बनते ही हैं, पार्टी के बड़े नेता भी असहज हो जाते हैं। राजनीति में तो बहुत सोच-समझकर बोलना चाहिए। राहुल गांधी को शायद याद नहीं होगा, इसलिए वह इतिहास के पन्ने पलट लें, जिस आरएसएस को वह जिहादी कह रहे हैं, उसी आरएसएस पर उनके नाना और पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने विश्वास जताया था। दरअसल, 1962 में भारत-चीन युद्ध में आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने बहादुरी का परिचय दिया था। वह भी मातृभूमि की रक्षा के लिए आगे बढ़ चले थे। सीमा पर डटे जवानों के लिए खाद्य सामग्री पहुंचाने और घायल जवानों के इलाज में काफी मदद की थी। नि:स्वार्थ भाव से सेवा कार्य को देखकर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू अभिभूत हो उठे थे। इसके बाद उन्होंने 26 जनवरी को आरएसएस के स्वयंसेवकों को दिल्ली में परेड में शामिल करने के लिए उस समय के सरसंघचालक माधवराव सदाशिव गोलवकर से निवेदन किया था। कहा, था कि वह स्वयंसेवकों को दिल्ली परेड में शामिल होने की अनुमति दे। बहुत कम समय में ही सैकड़ों की संख्या में स्वयंसेवक परेड में शामिल होने के लिए तैयार हो गए थे। स्वयंसेवकों को गणवेश में कदम से कदम मिलाते देख पंडित जवाहर लाल नेहरू गदगद हो गए थे और उन्होंने तारीफ भी की थी। आज राहुल गांधी उन्हीं स्वयंसेवकों काे जिहादी कहकर अपने नाना द्वारा पूर्व में किए गए कार्य पर ही सवाल खड़ा करने का काम कर रहे हैं। इससे दुर्भाग्यपूर्ण और कुछ नहीं हो सकता है।


