लखनऊ, 17 फरवरी (बु.)। उत्तर प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं कि डॉक्टर की उपस्थिति के बिना मरीजों को दवा न दें। सभी सरकारी अस्पतालों को नोटिस भेजकर अलर्ट किया गया है कि यदि ऐसी शिकायत मिली तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। तीन साल पुराने मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को आखिरकार जवाब भेज दिया गया। आयोग ने यह फाइनल रिमाइंडर भेजकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को चेतावनी दी थी कि वह इस प्रकरण पर ठोस कार्रवाई कर उसे सूचित करें। करीब तीन साल पहले जनवरी 2018 में बाराबंकी में सराय गोपी स्थित सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की अनुपस्थिति में वार्ड ब्वाय दवा बांटते पाया गया था। मीडिया में मामला प्रकाश में आने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस प्रकरण पर स्वास्थ्य विभाग के सचिव से लेकर प्रमुख सचिव तक से जवाब मांगा लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया। 26 नवंबर, 2020 को भी सख्त नोटिस जारी की गई मगर कोई जवाब नहीं मिला। जिसके बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अंतिम रिमांडर भेजते हुए 22 फरवरी 2021 तक मामले में हुई कार्रवाई और रोकथाम के लिए उठाए गए कदम के बारे में विस्तृत रिपोर्ट मांगी। ऐसे में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के उप सचिव शिव गोपाल सिंह की ओर से मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजकर सूचित किया गया है कि ऐसे मामले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य की ओर से सभी अस्पतालों को नोटिस भेजकर अलर्ट किया गया है।


