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Thursday, March 19, 2026

दिल्लीः सुनसान हो गई यूपी गेट पर बसी किसानों की बस्तियां

दिल्ली, 25 फरवरी  (बु.)। तीन कृषि कानूनों के विरोध में जब प्रदर्शनकारियों ने यूपी गेट पर डेरा डाला तो दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे व एनएच नौ पर हजारों टेंट लगने से पूरा शहर सा बस गया। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड समेत अन्य प्रदेशों से हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी यूपी गेट पहुंचे। हाल यह हो गया कि किसानों का अपना चूल्हा जलने लगा, धरनास्थल पर शाही दस्तरखान सज गया और कपड़े धोने से लेकर स्त्री करने, नहाने का गर्म पानी, हजामत समेत हर सुविधा धरने में मिलने लगी। ट्रैक्टरों की ऐसी कतार कि जहां तक नजर जाए वहां तक ट्रैक्टर ही ट्रैक्टर दिखाई दें। 26 जनवरी को हुए उपद्रव व बढ़ती हुई गर्मी के साथ अब यूपी गेट पर बसी टेंटों की बस्तियों की रौनक चली गई है। टेंटों की बस्तियां अब सुनसान हो गई हैं। टेंट खाली हो गए हैं तो मंच के सामने मुट्ठीभर प्रदर्शनकारी दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में किसान नेताओं के माथे पर चिता की लकीरें दिखाई दे रही हैं। 28 नवंबर से जब कृषि कानूनों के विरोध में धरना शुरू हुआ तो तेजी से यहां प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ने लगी। एक हजार से अधिक टेंट यूपी गेट पर लगा दिए गए और सभी टेंट प्रदर्शनकारियों से भरे रहते थे। यूपी गेट पर प्रदर्शनकारियों का एक अलग शहर सा बस गया था। मंच का भी यह हाल था कि बढ़ती हुई भीड़ के चलते लगातार इसकी लंबाई बढ़ाई जा रही थी। 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के नाम पर दिल्ली में हुए उपद्रव के बाद से ही यूपी गेट से प्रदर्शनकारियों ने पलायन शुरू कर दिया था। अब बढ़ती हुई गर्मी से टेंट तपने लगे हैं और धूप के कारण प्रदर्शनकारी मंच के सामने नहीं बैठ पा रहे हैं। ऐसे में प्रदर्शनकारी यूपी गेट छोड़कर अपने घरों को लौटने लगे हैं। टेंट पूरी तरह से खाली हो गए हैं। यहां इक्के-दुक्के ट्रैक्टर दिखाई दे रहे हैं। अब यूपी गेट पर दिखाई दे रही हैं तो सिर्फ लग्जरी कारें। प्रदर्शनकारियों के नेता लोगों को यूपी गेट धरनास्थल पर रोकने के लिए तमाम जतन कर रहे हैं। अब बढ़ती हुई गर्मी को देखते हुए यूपी गेट पर बड़ी संख्या में टेंट लगाने के लिए सामान पहुंच गया है। लोगों को रोकने के लिए प्रदर्शनकारी मंच से लगातार अपील कर रहे हैं। इसके साथ ही मंच के सामने धूप से बचने के लिए पंडाल भी लगाया जा रहा है। हालांकि प्रदर्शनकारी मानने को तैयार नहीं हैं कि उनकी संख्या में कोई कमी हुई है। मंच से लगातार कहा जाता है कि जब मंच पर संख्या कम होती है तो लोग टेंट में होते हैं और जब टेंट में भीड़ कम होती है तो लोग मंच पर होते हैं।

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