दिल्ली, 23 फरवरी (बु.)। एक बार महात्मा गांधी ने कहा था कि यहां सभी की जरूरत के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन जब बात लालच की आती है, तो वहां यह बात लागू नहीं होती। दोषी ने भी अपनी लालच की भूख मिटाने के लिए बार-बार भ्रष्टाचार जैसा संगीन अपराध किया है। दोषी का लालच इससे भी साबित होता है कि वह पहले भी सात लाख रुपये रिश्वत लेने के मामले में सजा पा चुका है। राउज एवेन्यू अदालत की विशेष न्यायाधीश नीरजा भाटिया ने यह टिप्पणी पर्यावरण मंत्रालय के पूर्व उप निदेशक नीरज खत्री को भ्रष्टाचार के मामले में पांच साल कठोर कारावास और पांच लाख रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाते हुए की है। खत्री के अलावा वीवी मिनरल्स, इसके पार्टनर एस. वैकुंडाराजन और लाइजन आफिसर शुभलक्ष्मी को भी सजा दी गई है। वैकुंडाराजन की वृद्धावस्था को ध्यान में रखते हुए तीन साल जेल और पांच लाख रुपये का जुर्माना अदा करने का आदेश दिया गया है। वहीं, शुभलक्ष्मी की अकेली मां होने की दलील पर गौर करते हुए तीन साल जेल और दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वीवी मिनरल्स पर दस लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। वैकुंडाराजन और शुभलक्ष्मी द्वारा जुर्माना अदा करने और फैसले के खिलाफ अपील दायर करने की दलील के बाद 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर उन्हें जमानत दे दी गई। वहीं, खत्री ने जुर्माना अदा नहीं किया, लिहाजा उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।


