लखनऊ, 29 नवम्बर (बु.) । वर्ष 2020 का आखिरी चंद्र ग्रहण कल यानि 30 नवंबर को लगने जा रहा है। सोमवार को कार्तिक पूर्णिमा है और इसी दिन देव दीपावली भी मनाई जाती है। यह चंद्र ग्रहण कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को लग रहा है। यह खगोलीय घटना दोपहर एक बजकर चार मिनट से शुरू होकर शाम पांच बजकर 22 मिनट तक होगी। यह कुल चार घंटे 18 मिनट 11 सेकंड तक रहेगा, जबकि, 3:13 मिनट पर यह अपने चरम पर होगा। इस बार का चंद्रग्रहण भारत सहित अमेरिका, प्रशांत महासागर, एशिया और आस्ट्रेलिया में भी दिखाई देगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार बताया जाता है की जब कभी भी चंद्र या सूर्य ग्रहण की स्थिति बनती है तो सूतक लगता है। इस दौरान पूजा-पाठ और मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं, लेकिन इस बार लग रहे उपछाया ग्रहण से सूतक कोई प्रभाव नहीं होगा, इस दिन भी आम दिनों की तरह मंदिर खुला रहेगा और सभी धार्मिक कार्यक्रम जारी रहेंगे। ज्योतिषियों के अनुसार 30 नवंबर को लग रहा चंद्र ग्रहण, उपछाया चंद्र ग्रहण होगा। इस वजह से सूतक नहीं माना जाएगा। उपछाया उस स्थिति में लगता है जब पृथ्वी की वास्तविक छाया में न आकर उसकी उपछाया से ही वापस लौट जाता है। इस स्थिति में चांद पर एक धुंधली सी परत नजर आती है। ऐसे में चांद के आकार पर भी कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन इसे नंगी आंखों से कतई न देखें। उपछाया चंद्र ग्रहण बहुत अधिक प्रभावशाली नहीं होता है। इसलिए सूतक काल भी मान्य नहीं होता। आचार्य शक्तिधर त्रिपाठी ने बताया कि उपछाया चंद्र ग्रहण का कोई भी धार्मिक असर मान्य नहीं होता है।कुछ राशियों पर इसका असर पड़ेगा, लेकिन ग्रहण के दौरान किसी भी तरह का लोकाचार करने की जरूरत नहीं है।


