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Thursday, March 19, 2026

शराब की दुकानें खोलने पर सियासत शुरू, अब मंदिर खोलने की मांग

वाराणसी, 5 मई (बु.)। कोरोना के चलते देश में करीब 40 दिन से लॉकडाउन लागू है। सभी तरह का व्यापार पूरी तरह से बंद किया गया है। जिसके चलते राज्य सरकारों के राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है। हालांकि अब कुछ क्षेत्रों में केंद्र सरकार की शर्तों के साथ फैक्ट्रियां शुरू कर दी गई हैं। लेकिन फिर भी गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए गृह मंत्रालय ने शराब की दुकानों को खोलने का फैसला लिया है क्योंकि राज्य सरकारों को सबसे ज्यादा रिवेन्यू जीएसटी के बाद शराब की बिक्री से ही मिलता है। हालांकि इस फैसले से कई लोगों ने इसका कड़ा विरोध भी किया है। खासकर काशी विद्वत परिषद ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अगर लॉकडाउन में मदिरालय खुल सकते हैं तो मंदिर क्यों नहीं?

शराब की दुकानें खोलने के मामले में सियासत भी तेज हो गई है। कई राजनीतिक पार्टियों ने केंद्र सरकार के इस फैसले को गलत करार दिया है। काशी से अब मंदिरों को भक्तों के लिए खोलने की मांग उठने लगी है। काशी विद्वत परिषद के विद्वान मानते हैं कि काशी सहित देश के अन्य हिस्सों में अगर मदिरा की दुकान खोली जा सकती हैं, तो मंदिर क्यों नहीं ? इसे लेकर विद्वत परिषद ने सरकार को पत्र भेजा है और ये मांग की है कि मंदिरों में प्रशासन भक्तों के दर्शन की व्यवस्था करे और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी कराए, लेकिन अब मंदिरों की व्यवस्था सुचारू की जाए।

वाराणसी में बाबा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, श्री संकट मोचन मंदिर, श्री दुर्गाकुंड मंदिर, बाबा काल भैरव मंदिर सहित सभी प्रमुख भक्ति स्थल भक्तों के लिए प्रतिबंधित हैं। प्रशासन का तर्क है कि जब भक्त दर्शन को पहुंचेंगे, ऐसे में भीड़ के चलते कोरोना का खतरा बढ़ने की आशंका है।

ऐसे में प्रदेश में जब शराब की दुकान खुली तो काशी विद्वत परिषद भड़क उठा। काशी विद्वत परिषद ने सरकार से अब मंदिरों को खुलवाने की मांग की है। सोमवार को जब शराब की दुकानें खुली तो भारी भीड़ उमड़ पड़ी, लेकिन वाराणसी में मंगलावर को शराब की दुकानों का रूप थोड़ा सुधरा दिखा। प्रशासन भी लगातार चक्रमण करता रहा। काशी विद्वत परिषद भी इसी को आधार मान रहा है कि प्रशासनिक सख्ती से जब बिगड़े रूप को सुधारा जा सकता है, तो मंदिरों में दर्शन की व्यवस्था क्यों नहीं।

मंदिरों को खोलने की मांग काशी विद्वत परिषद ने रखी, तो मामले पर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस और सपा ने भी इस मामले को आधार बना लिया है। कांग्रेस नेता अजय राय ने भी मंदिरों को खोलने की मांग का समर्थन किया है और जल्द से जल्द मंदिर खोलने की मांग की है।

 

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