शाहपुर, 27 मार्च (बु.)। सन 1998 में बनी मशहूर अभिनेत्री काजोल अभिनीत हिंदी फिल्म दुश्मन में गाई गई मशहूर गायक जगजीत सिंह की गजल ‘चि_ी न कोई संदेश जाने वह कौन सा देश जहां तुम चले गए इस दिल को लगा कर ठेस कहां तुम चले गएÓ के बोल आजकल कोरोनावायरस के चलते देशभर में चल रहे 21 दिनों के लाक डॉन पर सटीक बैठ रही हैं। यह बात आम नागरिक नहीं अपितु नगर व क्षेत्र में विचरण करने वाले पशु पक्षी, मानव से पूछ रहे हो कि आखिर कहां तुम चले गए। यह बात हम इसलिए कह रहे कि लाक डाउन के कारण जहां देशभर में अघोषित क र्यू जैसे हालात हैं, इसके साथ ही शाहपुर में भी ऐसा ही नजारा है। पिछले 3 दिनों से सड़कें सुनसान पड़ी हैं, बाजार वीरान है, पक्षियों के कलरव भी अब नहीं सुनाई पड़ते हैं। नगर में हजारों की तादाद में बंदर हैं, जो अक्सर अपनी नटखट अदाओं से लोगों को परेशान कर भले ही अपना भरण पोषण कर रहे थे, किंतु अब सुनसान सड़कों व बाजारों के कारण इन निरीह प्राणियों को भी दो वक्त की रोटी मयस्सर नहीं हो पा रही है। इतना ही नहीं यकायक लोगों की चहल-पहल कम होने के चलते नगर में बंदरों की सं या भी आश्चर्यजनक रूप से घटने लगी है। यदा-कदा कहीं गली मौहल्लों में यदि बंदर है, भी तो वह भी इस नजारे को देखकर भौचक्के हैं। 22 मार्च को जनता क र्यू के दौरान जब शाम 5:00 बजे नगरवासियों ने एकत्रित होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर थाली वह ताली बजाई थी, तब यही वानर मकानों की छतों पर एकत्रित होकर इस नजारे को देखकर आश्चर्यचकित नजर आ रहे थे, लेकिन अब 21 दिनों के लॉक डाउन में जब सब कुछ विरान पड़ा है, ऐसे में यह बंदर भी बेबस और लाचार नजर आ रहे हैं, उनके रहन सहन एवं हरकतों में भी अजीब सा सन्नाटा दिखाई दे रहा है। 3 दिन पूर्व तक नगर में कस्बा पुलिस चौकी प्रभारी के कार्यालय में धमा चौकड़ी मचाने वाले बंदरों की कहानी तो यही है। वहीं नगर में विचरण करने वाले आवारा पशुओं का भी यही हाल है एवं गली मौहल्ला के स्वान भी अब कहीं भोंकते नजर नहीं आ रहे हैं, वहीं सोन चिरैया व गुरसल कोयल व आदि की कलरव भी अब कहीं सुनाई नहीं दे रही है, ऐसा लग रहा है कि मानो वह भी लॉक डाउन की स्थिति में चले गए हैं तथा कोरोना से जंग लड़ रहे दुनिया के लोगों के गम में शरीक हो गए हैं।